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अनोखी सर्जरी: मरीज को मौत के मुंह से निकाल लाए लखनऊ के डॉक्टर

Sat, 12 Sep 2015 09:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 12 Sep 2015 09:28 PM IST
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ram manohar lohia doctor treated blue baby syndrome

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को साढ़े आठ घंटे तक चली पीडियाट्रिक सर्जरी के बाद 15 साल के किशोर को नई जिंदगी दी है। दिल की बीमारी से पीड़ित सिद्धार्थनगर के पंकज को परिवारीजन लोहिया संस्थान लेकर पहुंचे तो जांच रिपोर्ट देख डॉक्टर भी हैरान रह गए।

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सर्जरी करने वाले कार्डियक सर्जन डॉ. एसएस राजपूत ने बताया कि पंकज को जन्मजात हृदय रोग था जिसे मेडिकल की भाषा में करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट आर्टरी के नाम से जाना जाता है। इस तरह की बीमारी से ग्रसित मरीज थोड़ा सा काम करने, चलने या दौड़ने पर थक जाता है। सांस फूलने लगती है और शरीर नीला पड़ने लगता है जिसे ब्लू बेबी सिंड्रोम कहते हैं।
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इस बीमारी में दिल का बायां चैंबर दाएं का काम करता है और दाएं चैंबर का काम बायां करता है। दिल से फेफड़े को रक्त ले जाने वाली पल्मोनरी आर्टरी भी जन्म से सिकुड़ी हुई थी और दिल के बाएं और दाएं चैंबर के बीच के पर्दे में छेद था। ऐसी बीमारी से पीड़ित मरीज की कभी भी सडेन डेथ हो सकती है।
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इसे देखते हुए जान बचाने के लिए बृहस्पतिवार को बाईपास मशीन से साढ़े आठ घंटे तक ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में पल्मोनरी आर्टरी को खोल कर चौड़ा किया गया और छेद बंद कर दिया गया।

इस प्रक्रिया से अशुद्ध रक्त शुद्ध रक्त से नहीं मिलेगा और शरीर भी नीला नहीं पड़ेगा। टीम में शामिल डॉ. शोएब अली ने बताया कि साढ़े आठ घंटे तक चली सर्जरी के बाद मरीज को नई जिंदगी मिल चुकी है। अब वो सामान्य जीवन जी सकता है।

20 हजार हृदय रोगियों में दो को होती है बीमारी

ram manohar lohia doctor treated blue baby syndrome

डॉ. एसएस राजपूत और डॉ. शोएब अली बताते हैं कि यह बीमारी 20 हजार हृदय रोगियों में एक या दो को ही होती है। उन्होंने बताया कि इस तरह के ऑपरेशन में हृदय को विद्युत प्रवाह करने वाला कंडक्शन 95 फीसदी मरीजों का खराब हो जाता है।

इसकी भरपाई के लिए पेसमेकर लगाना पड़ता है। लेकिन पंकज के ऑपरेशन में इस तरह का कुछ भी नहीं हुआ और आठ घंटे तक चली लंबी सर्जरी में कंडक्शन सिस्टम को बचा लिया गया।

ये डॉक्टर रहे टीम में शामिल
पंकज को नई जिंदगी देने के लिए डॉ. एसएस राजपूत, डॉ. शोएब अली, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मुकुल मिश्रा, डॉ. पीके दास, डॉ. सुदर्शन, डॉ. नवीन जामवाल, एनेस्थेटिस्ट में संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. पीके दास, डॉ. शिवानी, डॉ. राजीव दुबे, डॉ. अमितेष पाठक और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक चौहान के साथ पैरामेडिकल स्टाफ में धर्मेंद्र, सुधा, छाया, आगाशाही, हार्ट लंग
मशीन के एक्सपर्ट शैलेंद्र सिंह मौजूद रहे।

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