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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ram Mandir offerings: Learn the full story of the robbery. Subhash formed a gang at Tinnu's instigation

राम मंदिर चढ़ावा: जानिए लूट की पूरी कहानी, टिन्नू की शह पर सुभाष ने बनाया गिरोह; पार होती रही दान की राशि

Sat, 27 Jun 2026 08:16 AM IST
रोहित मिश्र सूरज शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 27 Jun 2026 08:16 AM IST
सार

Ram Temple donation theft:संगठित गिरोह की तरह साजिश रचकर राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों का गबन किया गया। इस पूरे मामले में पदाधिकारी आंख बंद किए हुए बैठे रहे। 

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Ram Mandir offerings: Learn the full story of the robbery. Subhash formed a gang at Tinnu's instigation
राम मंदिर में बड़े नाम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 संगठित गिरोह की तरह साजिश रचकर राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों का गबन किया गया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव की शह पर सारा खेल होता रहा। गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने चोरी के लिए पूरा गिरोह तैयार किया।

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इन सब के बीच ट्रस्ट के पदाधिकारी आंखें मूंदे रहे। यह मिलीभगत थी या लापरवाही, यह जांच पूरी होने पर ही पता चलेगा। लेकिन गिरोह आसानी से करोड़ों रुपये पार करता रहा। पुलिस की तफ्तीश में पूरा खेल धीरे-धीरे उजागर हो रहा है। चंपत और अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच जारी है।
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दरअसल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर चंपत राय का हाथ था। वह ट्रस्ट या किसी अन्य इकाई का कोई पदाधिकारी या सदस्य नहीं था, लेकिन उसका हस्तक्षेप मंदिर प्रबंधन के प्रत्येक कार्य में रहता था। उसकी हनक के आगे सुरक्षाकर्मी भी उसके आने-जाने पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाते थे।
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इस दबदबे का फायदा पूरे खेल में उठाया गया। गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने टिन्नू के साथ मिलकर साजिश रची। फिर टिन्नू ने अपने बंदे यानी अन्य आरोपियों को साथ में शामिल किया। उसके बाद रकम पार करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो कई वर्षों तक चलता रहा।

पकड़े जाने का नहीं था डर

गणना की निगरानी से लेकर दान पेटियों की चाबी तक टिन्नू के पास रहती थी। चूंकि मिलीभगत थी, तो सुभाष को पता था कि कुछ होने वाला नहीं है। सुभाष गणना में लवकुश, अनुकल्प, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्र आदि की ड्यूटी लगाता था। ड्यूटी लगाने को लेकर कोई टोका-टाकी नहीं करता था। फिर आराम से रुपयों की गड्डियां पार करते थे। बाद में बंटवारा होता था।

साजिश का हिस्सा या नहीं... जांच के बाद होगा साफ

संवेदनशील काम टिन्नू को सौंपना और फिर करोड़ों की रकम पार हो जाना कोई आम बात नहीं है। वह भी हाईटेक कैमरों के सामने। इसलिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी शक की सुई घूम रही है। फिलहाल एफआईआर में किसी का नाम शामिल नहीं है, लेकिन जब विवेचना आगे बढ़ेगी और दूसरी तरफ एसआईटी की विस्तृत तफ्तीश पूरी होगी, तब पता चल सकेगा कि पदाधिकारियों की कोई मिलीभगत थी या नहीं। फिलहाल पदाधिकारी शक के दायरे में हैं। भूमिका की जांच जारी है।

बैंक वालों का जाता था हिस्सा

पूरे खेल में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। टिन्नू और सुभाष इन बैंक वालों को एक तय हिस्सा दिया करते थे। सूत्रों ने बताया कि कई बार बैंक कर्मियों ने खुद भी रकम सीधे पार की है, जिसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं।
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