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राम मंदिर के साथ आंदोलन के इतिहास को भी संजोने का प्रयास, संघर्ष करने वालों को विस्मृत नहीं किया सकता

Fri, 24 Jul 2020 10:53 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 24 Jul 2020 10:53 AM IST
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ram janm bhoomi ayodhya Attempts to preserve the history of the movement along with the Ram temple
विहिप का राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला
अब जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा पूरी होने जा रही है, संत व संघ परिवार मंदिर के साथ आंदोलन के संघर्ष व अभियानों की स्मृतियों को भी संजोने के प्रयास में जुटे हैं। इसके पीछे मकसद यह है कि अयोध्या आने वाले देश-विदेश के लोगों को एक नजर में मंदिर आंदोलन की पूरी जानकारी मिल जाए। 
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उन्हें यह भी पता चल जाए कि हिंदुओं के लिए यह मंदिर दूसरे मंदिरों से अलग महत्व का क्यों रखता है? इस स्थान पर करोड़ों हिंदुओं की मंदिर की आकांक्षा को मूर्त रूप देने के लिए सड़क से सदन ही नहीं न्यायालय तक कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी और कितने लोगों का बलिदान हुआ। संकल्प से सिद्धि तक के रास्ते में कौन-कौन से महत्वपूर्ण पड़ाव रहे।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट से मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद से विहिप और संतों की इच्छा मंदिर निर्माण के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को घटनाक्रम व उन लोगों के बारे में भी बताने की रही है जिन्होंने मंदिर के लिए संघर्ष किया है। ये उन शख्सियतों की स्मृतियों को भी संजोकर रखना चाहते हैं जो 1528 से लेकर सर्वोच्च न्यायालय से मंदिर के पक्ष में फैसला आने तक चार सदी से ज्यादा चले संघर्ष व आंदोलन के महत्वपूर्ण पड़ाव के मुख्य किरदार रहे। 
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विहिप की चिंता उन लोगों को देश की राजनीति की धारा बदलने वाले इस आंदोलन के बारे में बताने की भी है जो 90 के दशक में चले आंदोलन के बाद जन्म लिया है अथवा वे तब अधिकतम 7-8 वर्ष के थे। इसके लिए कई विकल्प चर्चा में हैं। इनमें स्तंभ से लेकर प्रतिमाएं तक शामिल हैं। जिससे हिंदुत्व के सरोकारों पर संदेश साफ  रहे। इन्हें मंदिर परिसर के आसपास ही स्थापित कराने का प्रयास है। 
 

संघर्ष करने वालों को विस्मृत नहीं किया सकता

जिन लोगों ने हिंदुत्व की आस्था व स्वाभिमान की इस लड़ाई में बलिदान दिया, संघर्ष किया, उन्हें उस समय विस्मृत नहीं किया जा सकता जब उनके संघर्ष की सफलता साकार रूप लेने जा रही है। - महंत नृत्यगोपाल दास, अध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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