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सपा के चौधरी प्रेम की खुलेगी पोल

Wed, 25 Dec 2013 11:51 AM IST
अखिलेश वाजपेई/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेई/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 25 Dec 2013 11:51 AM IST
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ralod will open the secret of sp charan singh attraction

राष्ट्रीय लोकदल ने सपा और इसके मुखिया मुलायम सिंह यादव की पोल खोलने का फैसला किया है।

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इसके लिए रालोद कार्यकर्ता सपा सरकार द्वारा चौधरी चरण सिंह के नाम वाली बंद की गई योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी देंगे।

रालोद न सिर्फ पश्चिम में बल्कि पूरे सूबे में सपा की राह में मुश्किलें खड़ी करेगा। साथ ही वह चौधरी साहब के समर्थकों को मुलायम के पाले में जाने से रोकने की कोशिश करेगा।

भले ही सपा ने राजेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर और चरण सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करके रालोद के परंपरागत जाट वोट में सेंधमारी की कोशिश की हो।
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यह कैसी निष्ठा
रालोद के राष्ट्रीय महासचिव कोकब हमीद सवाल उठाते हैं कि चौधरी साहब को दिवंगत हुए इतने वर्ष बीत गए लेकिन उन्होंने कभी मुलायम सिंह को दिल्ली के किसान घाट पर श्रद्धांजलि देते नहीं देखा। यह कैसी निष्ठा है?
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यही नहीं चौधरी चरण सिंह के नाम पर चलने वाली योजनाओं को सपा सरकार ने बंद कर दिया। आज किसी भी सरकारी कार्यालय में चरण सिंह की तस्वीर तक लगी नहीं मिलेगी।

किसानों के लिए शुरू की गई चौधरी चरण सिंह नलकूप योजना और चौधरी चरण सिंह नहर पटरी योजना भी सियासी वजहों से खत्म कर दी गई। ऐसे लोग चौधरी साहब के वारिस होने का दावा कैसे कर सकते हैं। रालोद यह सच्चाई जनता को भी बताएगा।

यह है वजह
दरअसल, विधानसभा चुनाव में सपा को जाट वोट ने बड़ा झटका दिया था। पार्टी का एक भी जाट उम्मीदवार नहीं जीत पाया।

अब लोकसभा चुनाव में जाट वोटों में सेंधमारी के लिए मुलायम ने न सिर्फ राजेंद्र चौधरी को अखिलेश सरकार में मंत्री बनवाया बल्कि एक-दो और नेताओं को भी लालबत्ती दी।

विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने अनुराधा चौधरी को सपा में शामिल करके रालोद व अजित सिंह को झटका दिया तो रालोद के दो सांसद सारिका बघेल और देवेन्द्र नागपाल को भी उनसे अलग कर दिया। स्वाभाविक है, रालोद और अजित सिंह सपा व मुलायम से इसका बदला लेने की कोशिश करेंगे।

रैली ने भी दिए संकेत
मेरठ रैली में जिस तरह मुलायम और भाजपा पर हमला बोला गया और मुलायम की चरण सिंह के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाए गए, चौधरी साहब के नाम पर चलने वाली योजनाओं को बंद करने पर सपा सरकार से जवाब मांगने का ऐलान हुआ, उससे चौधरी साहब की विरासत पर दावेदारी का झगड़ा आगे बढ़ने के संकेत मिलते हैं।

अजित सिंह के साथ दिग्विजय सिंह और भूपेन्द्र हुड्डा जैसे नेताओं की मंच पर मौजूदगी से यह भी साफ हो गया कि रालोद ही नहीं बल्कि कांग्रेस और जदयू भी एकजुट होकर चौधरी साहब की विरासत को मुलायम सिंह के पाले में जाने से रोकने की कोशिश करेंगे।

रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे कहते हैं कि रैली में लोगों की भारी जुटान ने साबित कर दिया कि भाजपा व सपा की इस बात में कोई दम नहीं है कि रालोद कमजोर हुआ है। रालोद इन दोनों की साजिश का पर्दाफाश करेगा।


लोगों को बताएगा कि चौधरी साहब कहते थे कि वह सिर्फ एक जाति व एक संप्रदाय को जानते हैं, जिसका नाम किसान है। सपा-भाजपा ने मुजफ्फरनगर की घटना पर किसानों को बांटने की साजिश की। रालोद किसानों को हिंदू-मुसलमान में बंटने नहीं देगा।

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