‘किसी से बदला लेने के लिए इस्लाम कुबूल करना गलत’
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राजस्थान में प्रमोशन न मिलने से नाराज दलित समाज के वरिष्ठ आईएएस अफसर उमराव सलोदिया के इस्लाम कबूल पर कानपुर के मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उनका कहना है कि इस्लाम अपनी शिक्षाओं से फैला है। किसी ने दिखावे, दूसरे से नाराजगी, बदला लेने या अपने सामाजिक-निजी फायदे के लिए इस्लाम कबूला है तो यह उचित नहीं है।
कार्यवाहक शहरकाजी मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने कहा कि इस्लाम व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ने, इंसानियत और समानता का धर्म है। दिल में सच्चाई हो और श्रद्धा हो, तभी इस्लाम कबूलने से वह मुसलमान होगा।
उमराव का बयान है कि वह पहले से इस्लाम से प्रभावित रहे हैं। आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने कहा कि इस्लाम प्रैक्टिकल दीन है।
उमराव ही बता सकते हैं क्यों कुबूला इस्लाम
इस्लाम अपनी अच्छाइयों से फैला है। अगर कोई प्रमोशन न मिलने या किसी से बदला लेने के लिए इस्लाम का सहारा ले तो यह उचित नहीं है। इस्लाम किसी से ईर्ष्या करने या बदला लेने की सीख नहीं देता है।
आल इंडिया तंजीम आइमा-ए-मसाजिद के महामंत्री मौलाना तहसीन रजा कादरी ने कहा कि सिर्फ मजहब ही नहीं कोई भी चीज दिल से होनी चाहिए, दिखावे के लिए नहीं।
यह तो उमराव ही बता सकते हैं कि उन्होंने इस्लाम क्यों कबूला। आल इंडिया माइनॉरिटी बोर्ड के अध्यक्ष हाफिज अब्दुल कुद्दूस ने कहा कि नाराजगी थी तो इस्लाम को ही क्यों चुना।
उन्होंने भेदभाव से नाराज होकर इस्लाम स्वीकार किया है क्योंकि इस्लाम में समानता है। दिलों का हाल अल्लाह जानने वाला है।