चुनावी खर्च में सबसे आगे निकले राजनाथ
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लोकसभा चुनाव की लखनऊ सीट से भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह प्रचार करने के मामले में सबसे आगे निकल चुके हैं। उन्होंने 8 लाख से ऊपर खर्च किया है।
जबकि सपा प्रत्याशी अभिषेक ने पौने चार लाख, बसपा के नकुल दुबे ने पौने तीन लाख रुपये खर्च किए हैं।
इससे इतर मोहनलालगंज सीट से बसपा प्रत्याशी आरके चौधरी पांच लाख से अधिक खर्च कर चुके हैं।
गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को चुनावी प्रचार पर खर्च के रजिस्टर की जांच कराने के 15 प्रत्याशी और उनके प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे।
राजनाथ निकले सबसे आगे
इस दौरान भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के नामित प्रतिनिधि ने अब तक चुनाव में प्रचार प्रसार के नाम पर 8,21,479 लाख रुपया खर्च होने की जानकारी दी।
इसके इतर सपा के अभिषेक मिश्रा की तरफ से 3,84,190 तो बसपा के नकुल दुबे ने 2,49,006 और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सरवर मलिक ने 2,41,565 लाख के खर्च का ब्यौरा दिया।
दूसरी तरफ मोहनलालगंज सीट से बसपा प्रत्याशी आरके चौधरी ने 5,69,726 और आप पाटी प्रत्याशी सुनील ने 1,03,963 लाख के खर्च की बात कहीं।
प्रत्याशी प्रतिनिधियों द्वारा खर्च रजिस्टर के माध्यम से उपलब्ध कराई जानकारी के बाद अब ऑडिट टीम इसका सत्यापन अभिलेखीय प्रमाण के आधार पर करेगी।
नहीं पहुंचे रीता और जावेद
दूसरी तरफ व्यय रजिस्टर का निरीक्षण कराने से गैरहाजिर रहे 14 प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर 19 अप्रैल को खर्च रजिस्टर के साथ बुलाया गया है।
मुख्य कोषाधिकारी अवध नारायण ने बताया कि व्यय रजिस्टर का निरीक्षण कराने को कांग्रेस प्रत्याशी डा. रीता बहुगुणा जोशी व आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जावेद जाफरी सहित 14 अन्य प्रत्याशी अनुपस्थित रहे।
उपिस्थत लोगों के नाम
राजनाथ सिंह, सपा प्रत्याशी अभिषेक मिश्रा व बसपा के नकुल दुबे सहित प्रत्याशी तारा पाटकर, नन्द कुमार लोधी राजपूत, राजकुमार सिंह, रामफल रावत, शिशुपाल यादव और मो. सरवर मलिक मौजूद रहे।
इसके अलावा पदम सिंह गुप्ता, मनोज सिंह, योग चन्द्र भट्ट, विनय प्रकाश मिश्रा, शैलेन्द्र सिंह यादव और सुभाष चन्द्र लहरी ने भी अपने नामित प्रतिनिधियों के माध्यम से चुनाव प्रचार खर्च के व्यय रजिस्टर को निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया।
सीए-अकाउंटेंट लगाएंगे नेताजी की नैया पार
चुनावी खर्च का हिसाब-किताब तैयार करना प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द बन गया है।
आयोग के नियम-कानून की जानकारी न होने ने परेशानी और बढ़ा दी है। इससे बचने के लिए वह अब सीए या वरिष्ठ लेखाकार की मदद ले रहे हैं।
व्यक्तिगत स्तर व पार्टी स्तर के खर्च में अंतर न कर पाने के कारण प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के प्रतिनिधि भी चुनावी खर्च का सत्यापन कराने में परेशानी झेल रहे हैं, ऐसे में उन्होंने लेखाकारों की मदद लेने का नया रास्ता निकाला है।