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स्कूल में छड़ी से पीटते थे मौलवी साहब, जब मंत्री बना तो... किस्सा सुनाते हुए भावुक हुए राजनाथ सिंह

Sun, 10 Dec 2017 10:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 10 Dec 2017 10:06 AM IST
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rajnath singh in convocation day in lucknow university.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को अपने बचपन के स्कूली दिनों का किस्सा सुनाते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि प्राइमरी स्कूल के दिनों में मेरे एक शिक्षक मौलवी साहब मुझे छड़ी से पीटते थे। उनका सिखाया हुआ अनुशासन मेरे जीवन में बहुत काम आया।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि प्राइमरी में हमारे पीटी के शिक्षक मौलवी साहब थे। जब कोई बच्चा अनुशासनहीनता करता तो वो उसे कभी छड़ी से पीटते थे तो कभी थप्पड़ लगाते थे। उनकी पिटाई से सभी बच्चे सही पीटी करने लग जाते।
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जब मैं यूपी का शिक्षामंत्री बना तो अपने काफिले के साथ घर जा रहा था। वाराणसी में चंदौली के पास एक 90 साल का बुजुर्ग फूल लिए हुए मेरे स्‍वागत के लिए खड़ा था। मैं उन्हें देखते ही पहचान गया कि वो मेरे मौलवी साहब ही हैं। मैंने गाड़ी रुकवाई और मौलवी साहब के पास गया। जो माला वो मेरे लिए लाए थे मैंने उसे उनके गले में डाला और पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। मौलवी साहब रोने लगे और मेरी आखों में भी आंसू आ गए।
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राजनाथ सिंह ने छात्रों से कहा कि आपसे ये सब बताने का मकसद यही था कि आप जीवन में चाहे जितने ऊंचे उठ जाएं लेकिन अपने शिक्षकों को कभी न भूलें। उनका सम्मान करें और उन्हें प्यार दें, जिन्होंने आपको ज्ञान दिया और जिनकी बदौलत आप जीवन के इस मुकाम तक पहुंचे।

राजनीति से भागें नहीं, इसे विश्वसनीय बनाएं युवा

rajnath singh in convocation day in lucknow university.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं का आह्वान किया कि वे राजनीति की विसंगतियों और कथनी-करनी में अंतर से ऊबकर भागें नहीं, बल्कि इसमें हिस्सा लेकर इसे विश्वसनीय बनाएं। वे बोले, युवाओं को विकास की राजनीति में सक्रिय होकर देश को ज्ञानवान, धनवान और विश्व गुरु बनाने में हाथ बंटाना चाहिए। सचेत भी किया कि सफलता के लिए युवाओं को मर्यादा का महत्व कभी नहीं भूलना चाहिए। गृहमंत्री और राज्यपाल राम नाईक ने 32 छात्रों और 159 छात्राओं समेत 191 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए। लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें डाक्टेरट की मानद उपाधि भी प्रदान की। सिंह के साथ राज्यपाल राम नाईक और उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा भी समारोह में शामिल रहे।

पूज्यनीय बनता है मर्यादा का पालन
गृहमंत्री ने कहा कि जीवन में कभी मर्यादा नहीं तोड़नी चाहिए। रावण, राम से ज्यादा धनवान, बलवान और ज्ञानवान था। मगर, दुनिया में रावण के बजाय श्रीराम इसलिए पूजे जाते हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा मर्यादा का पालन किया। मर्यादा का पालन केवल प्रिय ही नहीं बल्कि पूज्य भी बनाता है। केंद्रीय गृहमंत्री ने थॉमस एल फ्रीडमैन के लेख ‘इंफोसिस एंड अलकायदा’ का हवाला देते हुए कहा कि दोनों में नौजवान हैं। दोनों के नौजवान शिक्षित और अपने कार्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं। दोनों का वैश्विक नेटवर्क है, लेकिन सोच के अंतर के कारण इंफोसिस का नौजवान समाज के लिए कल्याणकारी और अलकायदा का नौजवान समाज के लिए विनाशकारी बन गया है। इसलिए शिक्षा नहीं बल्कि सोच व्यक्ति को बड़ा या छोटा बनाती है।

संस्कृति और धर्मशास्त्रों पर शोध कराएं
राजनाथ सिंह ने एलयू के कुलपति से संस्कृति और धर्मशास्त्रों पर भी शोध कराने का आग्रह किया। कहा कि भारतीय संस्कृति, धर्मशास्त्र में बहुत कुछ है, जिस पर शोध किया जा सकता है। इसके जरिये लविवि, भारत की विरासत से पूरे विश्व को परिचित करा सकता है।

व्यवस्था के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी से बचें

rajnath singh in convocation day in lucknow university.

गृहमंत्री ने कहा कि व्यवस्था के खिलाफ लड़ना नौजवानों का स्वभाव होता है। पर, यह ध्यान रखना चाहिए कि व्यवस्थाएं बनने में लंबा समय लगता है। कभी भी व्यवस्था के खिलाफ ऐसी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिससे जनता में व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़े।

स्वामी विवेकानंद भारत के पहले ग्लोबल यूथ
गृहमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत के पहले ग्लोबल यूथ थे। उन्होंने विश्व को भारत और भारतीयता से परिचित कराया था। विदेशों में जब लोग उनके वस्त्रों पर टिप्पणी करते तो वह विदेशियों से कहते कि ‘इन योर कंट्री टेलर मेक्स दी मैन, बट इन ऑवर कंट्री कैरेक्टर मेक्स दी मैन।’

कुलपति की खिंचाई
कुलपति के दीक्षोपदेश में माता-पिता के साथ गुरु का नाम न होने पर गृहमंत्री ने उनकी खिंचाई भी की। कहा कि वैसे तो उन्हें कुलपति के भाषण में त्रुटि निकालने का अधिकार नहीं, लेकिन जीवन में माता-पिता के साथ गुरु का भी कम महत्व नहीं है। भविष्य में दीक्षांत समारोह में माता-पिता के साथ गुरु का भी नाम रहे तो ठीक रहेगा। हालांकि राज्यपाल राम नाईक ने सफाई दी कि प्रिंटिंग में गड़बड़ी के कारण ऐसा हो गया।

राजनाथ सिंह को मानद उपाधि

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राजनाथ‌ सिंह - फोटो : amar ujala

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल राम नाईक ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को लखनऊ विश्वविद्यालय की मानद उपाधि दी। सिंह ने कहा कि उन्होंने कुलपति से आग्रह किया था कि अच्छा हो कि उन्हें यह उपाधि न दी जाए, क्योंकि वे खुद को इस उपाधि के योग्य नहीं मानते। पर, कुलपति ने कहा कि राज्यपाल का आदेश है। व्यवस्था में विश्वास करने का मूल स्वभाव होने के कारण मैं उनका आग्रह टाल नहीं सका। लविवि प्रशासन ने तीन साल बाद किसी को मानद उपाधि दी है। राजनाथ सिंह ने गोरखपुर विवि से फिजिक्स में एमएससी की डिग्री हासिल की थी।

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