फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Rajdeep Sardesai speaks in litrature carnival.

'मोदी कर्मयोगी पर खुद की इमेज चमकाने में ज्यादा बिजी'

Mon, 30 Nov 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 30 Nov 2015 12:03 AM IST
विज्ञापन
Rajdeep Sardesai speaks in litrature carnival.

लखनऊ लिटरेचर कार्निवाल में रविवार को कमाल खान से ‘देश के सामने चुनौतियां‘ विषय पर बातचीत करते हुए प्रसिद्ध पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने विभिन्न मुद्दों पर बेबाक राय रखी और प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राजनेताओं पर टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने टेलीविजन चैनलों को भी आड़े हाथों लिया।

विज्ञापन


प्रधानमंत्री मोदी के बारे में उन्होंने कहा कि वे कर्मयोगी हैं लेकिन वे अपनी खुद की इमेज को चमकाने में ही अधिक लगे रहते हैं। वे अच्छे इवेण्ट मैनेजर हैं। उन्हें मालूम है कि देश हो या विदेश, किस समय भाषण करने पर वे प्राइम टाइम पर अधिक से अधिक समय तक देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन


आज कोई पत्रकार उनसे सवाल नहीं पूछता, सेल्फी लेता है। वे रॉकस्टार हो गए हैं। नेता कम, परफार्मर हो गए हैं। वे विदेश की हाई प्रोफाइल यात्राओं में अधिक व्यस्त रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्हें आम आदमी से रिश्ता बनाना होगा। दाल दो सौ रुपए होती है और वे कैलिफोर्निया में अच्छे दिनों पर भाषण कर रहे होते हैं। मन की बात में दुख व्यक्त करने की जगह उन्हें  किसान के आत्महत्या करने पर उसके गांव जाना चाहिए। लालू प्रसाद यादव ने उनके बारे में कहा था कि छाती 56 इंच की होने से कुछ नहीं होता, दिल एक इंच का है।

कट्टरपंथी ताकतों के सत्ता में आने से बढ़ी मुश्किलें

Rajdeep Sardesai speaks in litrature carnival.

राजदीप ने कहा कि भारतीय समाज में असहिष्णुता पहले से ही रही है। वर्णाश्रम की व्यवस्था में असहिष्णुता है। मजदूरों, जनजातियों, आदिवासियों के साथ हमारा व्यवहार सहिष्णु नहीं रहा है। कट्टवादी ताकतें समाज में पहले से रही हैं लेकिन मुश्किलें इस कारण बढ़ गई हैं कि ऐसी ताकतें सत्ता में आ गई हैं।

उन्होंने कहा कि आज हर बात का ध्रुवीकरण हो जाता है। संवाद की स्थिति नहीं है। कोई बात कहने पर उसे पक्ष या विपक्ष में मान लिया जाता है। इससे हम जटिल चरित्रों को समझ नहीं पाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं हिन्दुस्तान छोड़कर जाने वाला नहीं हूं, यह मेरा देश है।

सरदेसाई ने कहा कि टेलीविजन पर हम नौटंकी ज्यादा करते हैं। हमने सेंस को सनसनी में बदल दिया है। टेलीविजन आज भारतीय समाज का आईना नहीं रह गया है बल्कि यह एक खास समाज को दिखाता है। चैनल असम की बाढ़ को कवर नहीं करते लेकिन शीना वोरा के अवशेष ढूंढने असम के एक गांव में पहुंच जाते हैं।

नौ से पांच वाली राजनीति करते हैं राहुल गांधी

Rajdeep Sardesai speaks in litrature carnival.

राहुल गांधी ने अभी तक ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे यह पता चले कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। नरेन्द्र मोदी, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार जैसे नेता 24 घण्टे राजनीति करते हैं लेकिन राहुल गांधी किसी बैंक कर्मचारी की तरह नौ से पांच तक की राजनीति करते हैं।

56 दिन की छुट्टी मनाने चले जाते हैं और ऐसा करते हुए अपने पार्टी के लोगों को भी नहीं बताते। जब बजट सत्र चल रहा होता है वे लापता हो जाते हैं।

टेलीविजन चैनलों के बारे में
हमें अपने बिजनेस मॉडल को बदलना होगा। बिहार के चुनाव के दौरान मुझे पता चला कि लोग नीतीश की सरकार को इसलिए वोट देना चाहते थे कि उन्होंने गांवों में बिजली व्यवस्था बेहतर कर दी है।

जहां तीन घण्टे बिजली आती थी वहां 22 घण्टे आने लगी है लेकिन किसी चैनल ने कभी पहले इसे खबर के रूप में नहीं दिखाया लेकिन हमें मीडिया पर समाज को बदलने की जिम्मेदारी नहीं डालनी चाहिए। समाज बदलेगा तो मीडिया भी बदलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed