यूपी: राजस्व परिषद के मुखिया का पद 15 दिन से खाली, मुख्य सचिव के बाद सबसे अहम होता है ये पद
राजस्व परिषद के चेयरमैन का पद मुख्य सचिव के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद के लिए जो नाम लाइन में है उनमें से एक को छोड़ कर ज्यादातर शासन स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कई तो मुख्य सचिव की कुर्सी की दौड़ में शामिल बताए जाते हैं।
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राजस्व परिषद के चेयरमैन का पद पिछले 15 दिनों से खाली है। सरकार इसके लिए किसी अफसर का नाम तय नहीं कर पा रही है। यह पद मुख्य सचिव के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश का पूरा राजस्व प्रशासन इसी के अधीन काम करता है और प्रदेश के समस्त कलेक्टर व कमिश्नर सीधे चेयरमैन के प्रति जवाबदेह माने जाते हैं।
इस पद पर मुख्य सचिव स्तर (अपर मुख्य सचिव) के ही किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की तैनाती की परंपरा रही है। कई बार मुख्य सचिव के पद से हटाए गए अधिकारी परिषद के चेयरमैन बनाए गए हैं। जावेद उस्मानी, अनूप मिश्रा जैसे कई अफसर मुख्य सचिव बनने के बाद परिषद के चेयरमैन बने। कई बार परिषद में इस तरह तैनाती हुई हैं कि उसे सरकार की नाराजगी के तौर पर समझा जाता रहा है।
नतीजा यह होता है कि आसानी से कोई अफसर परिषद आना नहीं चाहता। 29 अप्रैल को राजस्व परिषद के तत्कालीन चेयरमैन दीपक त्रिवेदी का निधन हो गया था। 30 अप्रैल को वे सेवानिवृत्त होने वाले थे। तभी से यह कुर्सी खाली है। बताया जा रहा है इस पद के लिए जो नाम लाइन में है उनमें से एक को छोड़ कर ज्यादातर शासन स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कई तो मुख्य सचिव की कुर्सी की दौड़ में शामिल बताए जाते हैं।
चेयरमैन तैनाती में देरी से शीर्ष ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल की भी अटकलें
प्रदेश की शीर्ष ब्यूरोक्रेसी में मुख्य सचिव के बदलने की अटकलें काफी दिनों से चल रही हैं। राजस्व परिषद चेयरमैन की तैनाती में देरी से इस अटकलबाजी को फिर हवा मिलने लगी है।
जानकार बताते हैं कि यदि सरकार को मुख्य सचिव बदलने की ही रणनीति सही नजर आए तो पूर्व के कुछ मुख्य सचिवों की तरह आरके तिवारी को राजस्व परिषद भेजने का मुफीद विकल्प होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रदेश में कार्यरत 1985 या 1986 बैच के आईएएस अधिकारियों में से किसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
मुख्य सचिव के बाद वरिष्ठ प्रमुख अफसर
मो. इफ्तेखारुद्दीन : 1985 बैच के हैं और तिवारी के बाद सबसे वरिष्ठ हैं। वर्तमान में उप्र. राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
आलोक सिन्हा : 1986 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और कृषि उत्पादन आयुक्त के अलावा अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत जैसे महत्वपूर्ण विभाग देख रहे हैं।
मुकुल सिंघल : 1986 बैच के हैं और लगभग तीन वर्ष से अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की जिम्मेदारी देख रहे हैं। एक दिसंबर, 2020 से राजस्व परिषद के सदस्य भी हैं। वे परिषद के वरिष्ठम सदस्य हैं।
कुमार कमलेश : 1986 बैच के हैं और अपर मुख्य सचिव नियोजन, कार्यक्रम क्रियान्वयन व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। 30 जून को वे रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में उन्हें बोर्ड में भेजने की कोई संभावना नजर नहीं आती।
अवनीश अवस्थी : 1987 बैच के हैं और मुख्यमंत्री के चुनिंदा करीबी अफसरों में शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव गृह, गोपन व कारागार के साथ यूपीडा के सीईओ हैं।