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केजीएमयू में आरक्षण की अनदेखी का मामला पहुंचा राजभवन
Mon, 04 Jan 2021 09:03 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 04 Jan 2021 09:03 PM IST
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केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
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केजीएमयू में प्रोफेसरों की नियुक्ति में आरक्षण का पालन नहीं किए जाने का मामला राजभवन पहुंच गया है। राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रोफेसर सहित सभी पदों पर आरक्षण के प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ के अध्यक्ष रामचंद्र पटेल ने राज्यपाल को भेजे पत्र में बताया कि 20 मार्च, 2020 को 230 शिक्षकों के पद विज्ञापित किए गए थे जिसमें 23 प्रोफेसर, 7 एडिशनल प्रोफेसर, 42 एसोसिएट प्रोफेसर व 158 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद थे। इस विज्ञापन पर भी आरक्षण में गड़बड़ी की गई। राजभवन ने 8 दिसंबर, 2020 को कुलपति को नियमानुसार कार्यवाही का निर्देश दिया। इसके बाद भी कुलपति ने बिना आरक्षण नियमावली का पालन किए साक्षात्कार करा दिया। अब 11 प्रोफेसरों की नियुक्ति में भी आरक्षण नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने, विश्वविद्यालय में हो रही मनमानी रोकने और आरक्षण नियमों का पालन कराने की मांग की है।
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अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ के अध्यक्ष रामचंद्र पटेल ने राज्यपाल को भेजे पत्र में बताया कि 20 मार्च, 2020 को 230 शिक्षकों के पद विज्ञापित किए गए थे जिसमें 23 प्रोफेसर, 7 एडिशनल प्रोफेसर, 42 एसोसिएट प्रोफेसर व 158 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद थे। इस विज्ञापन पर भी आरक्षण में गड़बड़ी की गई। राजभवन ने 8 दिसंबर, 2020 को कुलपति को नियमानुसार कार्यवाही का निर्देश दिया। इसके बाद भी कुलपति ने बिना आरक्षण नियमावली का पालन किए साक्षात्कार करा दिया। अब 11 प्रोफेसरों की नियुक्ति में भी आरक्षण नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने, विश्वविद्यालय में हो रही मनमानी रोकने और आरक्षण नियमों का पालन कराने की मांग की है।
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