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Weather in Uttar Pradesh: बादलों की कंजूसी... ये जुलाई रह गई सूखी-सूखी
Wed, 03 Aug 2022 12:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Aug 2022 12:25 PM IST
सार
जुलाई के महीने में कम बारिश हुई। इसे जलवायु परिवर्तन का असर बताया जा रहा है। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है। हालांकि, अगस्त में भरपूर बारिश होने की संभावना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
राजधानी लखनऊ में बादलों की कंजूसी से इस साल की जुलाई सूखी ही रह गई। पूरे महीने में कुल 164.3 मिमी ही बारिश हुई। यह पिछले 12 वर्षों में जुलाई में हुई बरसात का सबसे निमभन स्तर रहा। हालांकि, अगस्त में भरपूर बारिश के आसार हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बाद भी जून-जुलाई में हुई कम बरसात की भरपाई नहीं हो पाएगी। इस बार जुलाई के शुरुआती 11 दिनों में सिर्फ 20.3 मिमी बारिश हुई। इसके बाद लगातार धूप-उमस बेहाल करती रही। इसके बाद 20 जुलाई से मानसून सक्रिय हुआ और इस दिन 52.3 मिमी पानी बरसा। वहीं, 21 जुलाई को भी 52.4 मिमी बारिश हुई। इसके बाद छिटपुट बरसात में ही महीना गुजर गया।
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2019 की जुलाई में खूब बरसे थे बदरा
पिछले 12 वर्षों का आंकड़ा देखें तो 2011 की जुलाई में 280.8 मिमी बारिश हुई थी। इसी तरह 2012 से 2021 तक जुलाई में 203.3 मिमी से लेकर 542.2 मिमी तक पानी बरसा है। इसमें सबसे ज्यादा 542.2 मिमी बारिश 2019 की जुलाई में हुई। इस साल 11 तारीख को एक दिन में ही 121.6 मिमी बरसात हुई थी।
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लखनऊ ही नहीं उत्तर प्रदेश में यही स्थिति
वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डॉ. सीएम नौटियाल कहते हैं कि लखनऊ के बीते 10-12 सालों के रिकॉर्ड यही बता रहे हैं कि इस साल वर्षा बहुत कम है। आमतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार सब जगह ऐसी ही स्थिति है। उत्तर-पूर्व भारत से बाढ़ के समाचार जरूर हैं, लेकिन वहां भी जुलाई में सामान्य से 45 फीसदी कम बारिश हुई है। कहीं ज्यादा और कहीं कम बारिश जलवायु परिवर्तन का लक्षण है। हालांकि लखनऊ में पूर्व में ये देखा गया है कि आरंभ में कम मानसून की वर्षा हो तो अंतिम चरणों में अधिक होती है। हालांकि, यह खेती के लिए नुकसानदायक होती है।
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साफ दिख रहा जलवायु परिवर्तन का असर
बीएसआईपी के भू-वैज्ञानिक डॉ. सुमन सरकार कहते हैं कि बारिश की अनियमितता पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिख रहा है। सामुद्रिक लहरों और हवा के पैर्टन में तेजी से बदलाव हो रहा है। यह एक धीमे जहर की तरह है। आने वाले वक्त में इसका गहरा असर पड़ेगा।
फसल उत्पादन पर असर दिखेगा
चंद्रभानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि जुलाई में कम बरसात से धान की फसल का रकबा घटा है। बहुत से किसानों ने धान की रोपाई नहीं की है। जिनके पास अपने खुद के पानी की व्यवस्था थी, सिर्फ वही रोपाई कर पाए हैं। मौसम में अचानक परिवर्तन के कारण दानों में टिलरिंग नहीं हो रही है, इससे उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। खरीफ में अच्छी बरसात न होने का असर रवी सीजन पर भी पड़ेगा। आलू, सब्जी, मटर, सरसों व गेहूं की फसल भी प्रभावित होगी। इसके विपरीत रिमझिम बारिश से मेंथा व केला किसानों को फायदा होगा।