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रेल बजट से यूपी में बसपा व सपा को मिल सकता है मौका

Thu, 25 Feb 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 Feb 2016 11:40 PM IST
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rail budget may create trouble for bjp in up.

उम्मीदें तो बहुत थीं कि रेल बजट के जरिये केंद्र सरकार उप्र में 2017 के एजेंडे पर काम की शुरुआत का संदेश देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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दूसरे स्थानों को छोड़ भी दें तो प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र वाले यूपी के लिए प्रभु की झोली से ऐसा कुछ खास नहीं निकला जो पूरे प्रदेश को संदेश दे सके और चुनाव में भाजपा का सहारा बनने की आस दिखे।

केंद्र सरकार ने धार्मिक स्थलों के स्टेशनों के सौंदर्यीकरण व सुधार के काम में उप्र को शामिल करके भारतीय संस्कृति से सरकार के सरोकारों का संदेश देने की कोशिश तो की लेकिन भगवा टोली का मुख्य एजेंडा अयोध्या यहां भी अनदेखा सा रह गया। सिर्फ काशी और मथुरा ही प्रभु के एजेंडे में जगह बना पाए।

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जो मिला उससे भी पूरा मैसेज नहीं
अयोध्या की अनदेखी की टीस आने वाले चुनाव में भाजपा के सरोकारों को लेकर सवाल खड़े किए बिना नहीं रहेगी। लोगों को उम्मीद थी कि मंदिर जब बनेगा तब बनेगा लेकिन भाजपा सरकार इस बजट के जरिये भगवा टोली की अयोध्या पर प्रतिबद्धता जताने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेगी। पर, ऐसा नहीं हुआ।
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इतना मिला, पर क्या बनेगी बात

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कहने को तो प्रदेश को लगभग 5000 करोड़ मिले हैं लेकिन यह सब पहले से तय कामों के लिए हैं। लखनऊ वाले काफी अरसे से मुंबई के लिए एक नई ट्रेन चलाने की मांग कर रहे हैं लेकिन यह मांग भी प्रभु की घोषणाओं में जगह नहीं बना पाई।

बजट में बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था से जुड़े क्षेत्र श्रावस्ती को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए 1600 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है।

भाजपा इसे उपलब्धि बता सकती है लेकिन गोंडा से बलरामपुर-तुलसीपुर मार्ग पर किसी नई ट्रेन की घोषणा न होने से लोगों की टीस इस उपलब्धि का पूरा लाभ मिलने में बाधा बन सकती है।

लोगों को उम्मीद थी कि बड़ी लाइन में बदल चुके गोंडा-तुलसीपुर मार्ग पर कम से कम एक और ट्रेन मिलेगी। बढ़नी-काठमांडू रेलमार्ग के सर्वेक्षण की घोषणा जरूर की गई है लेकिन 2017 के मद्देनजर यह घोषणा भी बहुत ज्यादा मदद करती नहीं दिखती। वजह, अभी यह काम सिर्फ सर्वेक्षण तक ही है।

मुद्दा बना सकते हैं विरोधी दल

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रेल बजट में यूपी को लेकर कंजूसी सपा और अन्य विरोधी दलों को भाजपा पर आरोप लगाने का हथियार दे सकती है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले दिनों ऐशबाग स्टेशन को चारबाग का सेटेलाइट स्टेशन बनाने और इलाहाबाद-कानपुर के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाने की मांग की थी।

साथ ही लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के समानांतर बुलेट ट्रेन चलाने की मांग की थी। इसके लिए रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए जमीन मुहैया कराने का वादा किया था। पर, ये मांगें भी बजट में जगह नहीं बना पाईं।

आमजन को उम्मीद थी कि राजधानी के विस्तार के मद्देनजर बाहरी इलाकों के आलमनगर, गोमतीनगर और मानकनगर जैसे स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ा कर चारबाग में भीड़ का दबाव कम किया जाएगा लेकिन यह आस भी पूरी नहीं हुई।

कितना काम आएंगे ये तर्क, भाजपा को होगी मुश्किल

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भाजपा की तरफ से यह तर्क दिए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार बजट का राजनीतिकरण नहीं करना चाहती। उसकी कोशिश है कि सौगातों के सहारे सियासी स्वार्थ साधने के बजाय सिस्टम को ठीक किया जाए।

रेल बजट के जरिये सरकार ने आर्थिक ढांचा मजबूत बनाने का संकल्प जताया है। इसका लाभ प्रदेश को भी होगा।

यह तर्क चुनाव में भाजपा की राह को कितना आसान बनाएंगे, यह तो आगे पता चलेगा। मगर रेल बजट से विपक्ष को भाजपा पर आक्रमण करने का एक नया हथियार जरूर मिल गया है।

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