राहुल बोले, जीते या हारें अमेठी हमारा घर है, आते रहेंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रियंका गांधी के साथ अचानक अमेठी पहुंचे राहुल ने जनता से विकास करने के वादे किए और कहा कि चुनाव जीते या हारें, अमेठी हमारा घर हैं, यहां आते जाते रहेंगे।
उन्होंने तीसरी बार अमेठी से चुनाव जीतने पर आम जनता को धन्यवाद दिया। आम जनता और कार्यकर्ताओं ने भी जीत की हैट्रिक बनाने पर राहुल को बधाई दी।
इस बीच राहुल ने कहा कि अमेठी उनका घर है। वह चुनाव जीते या फिर हारें, यहां आते रहेंगे। जहां भी काफिला रुका, वहां पर आम जनता ने भाई-बहन का स्वागत किया।
कहीं पर लड्डू खिलाकर तो कहीं पर फूलमालाओं से लादकर आम जनता ने भाई-बहन का स्वागत किया।
अचानक पहुंचे राहुल
बिना तय कार्यक्रम के दोपहर 12:40 अचानक अमेठी सांसद राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका के साथ फुरसतगंज एयरपोर्ट पहुंचे।
एयरपोर्ट से कार पर सवार होकर भाई-बहन अमेठी के लिए रवाना हुए। चुनाव के बाद पहली बार राहुल-प्रियंका का अमेठी का दौरा था।
भाई-बहन के एक साथ संसदीय क्षेत्र की आने की खबर मिलते ही कांग्रेसी पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट चौराहे पर पहुंच गई।
एयरपोर्ट चौराहे पर पवन शुक्ला, धर्मेंद्र मौर्या, समर यादव, राजाराम आदि ने फूलमालाओं से लादकर भाई-बहन का स्वागत किया।
विकास ही प्राथमिकता
इस दौरान राहुल ने चुनाव में मिली जीत के लिए क्षेत्र की जनता को धन्यवाद दिया। फुरसतगंज चौराहा पर शशी जायसवाल, अतुल कुमार, दिलीप यादव, पिंटू अग्रवाल, सुहैल कुरैशी, शफीक आदि ने राहुल को लड्डू खिलाकर उनकी जीत पर बधाई दी।
इस दौरान राहुल ने कहा कि अमेठी उनका घर है। यहां से वह चुनाव जीतें या फिर हारें, आते रहेंगे। अमेठी का विकास कराना ही उनकी पहली प्राथमिकता है।
जायस कस्बे के नौगजी चौराहे पर भी आम जनता ने फूलमालाओं से लादकर राहुल और प्रियंका का स्वागत किया।
राहुल ने जीत पर जायस की जनता का शुक्रिया अदा किया। जायस होते हुए राहुल और प्रियंका गौरीगंज के लिए रवाना हो गए।
हिल गई राजनीतिक जमीन
2004 और 2009 के चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज करने वाले राहुल गांधी को इस बार भाजपा की तरफ से चुनावी मैदान में उतरीं स्मृति ईरानी ने कड़ी टक्कर दी हालांकि राहुल अपना दुर्ग बचाने में कामयाब जरूर रहे पर उन्हें यह एहसास जरूर हो गया कि अगर क्षेत्र में विकास न हुआ तो उन्हें यहां से नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
राहुल का गढ बचाने के लिए प्रियंका गांधी ने भी क्षेत्र में सघन प्रचार किया था वहीं राहुल भी मतदान के दिन अमेठी में ही रहे।