..तो निरस्त हो जाएगा आम आदमी पार्टी का रजिस्ट्रेशन
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आम आदमी पार्टी के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं। कानपुर से पार्टी को लेकर जो चिंगारी उठी है, वह अरविंद केजरीवाल के लिए असाध्य समस्या साबित हो सकती है।
महानगर से पार्टी की राष्ट्रीय कार्यपरिषद के सदस्यों ओमेंद्र भारत और डा. पुनीत नाथ की सदस्यता पर प्रश्न चिन्ह उठाते हुए पटियाला हाउस कोर्ट, दिल्ली ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।
इस मामले में दिल्ली में ही मुकदमा भी दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन दोनों ने अपनी पूर्व राजनैतिक पार्टी जनराज्य से इस्तीफा दिए बगैर ही आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। ऐसे में ’आप’ का भी रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जाना चाहिए।
आईआईटी पासआउट ने बनाई थी पार्टी
जनराज्य पार्टी का उदय 2009 के लोकसभा चुनाव में हुआ था। जिसमें देश भर के आईआईटी पास आउट छात्रों ने मिलकर एक राजनीतिक दल का गठन किया था। जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. पुनीत नाथ और राष्ट्रीय महासचिव ओमेंद्र भारत बनाए गए थे।
उस दौरान चुनाव में मिली भारी असफलता के चलते यह पार्टी नेपथ्य में चली गई। अब पांच साल बाद अचानक इसमें नया मोड़ आ गया है।
जनराज्य पार्टी के कोषाध्यक्ष रविशंकर यादव ने ‘आप’ के इन दोनों संस्थापक सदस्यों के साथ इनकी पार्टी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है।
ये हैं आरोप
उन्होंने आरोप लगाया है कि जनराज्य पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव ने अपने पद से इस्तीफा दिए बगैर दूसरी राजनीतिक पार्टी ज्वाइन कर ली।
यह कानूनन गलत है, ऐसे में इनके साथ साथ आम आदमी पाaर्टी का रजिस्ट्रेशन भी रद किया जाए।
इससे पहले चुनाव आयोग में भी इस मामले में शिकायत दर्ज करायी जा चुकी है।
दिल्ली में चल रही जांच में यदि यह साबित हो जाता है, तो आप को हर रोज लग रहे झटकों में यह सबसे बड़ा झटका होगा।
'आप' के नगर संयोजक पहले ही दे चुके इस्तीफा
आम आदमी पार्टी के महानगर संयोजक योगेश श्रीवास्तव ने लोकसभा चुनाव के ऐन वक्त पर ही पार्टी को अलविदा कह दिया था। उनका आरोप है कि पार्टी के अंदर जिस तरह से मनमानी चल रही है, ऐसे में वहां रह पाना मुश्किल था। अभी तक पार्टी में कोई स्थायी महानगर संयोजक नहीं बनाया गया है।
मामले पर आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य ओमेंद्र भारत का कहना है कि जिस समय ‘आप’ की सदस्यता ग्रहण की थी, उससे पहले जनराज्य पार्टी की आम बैठक बुलाकर इस्तीफा दिया गया था।
पहले रविशंकर यादव भी आम आदमी में शामिल होना चाहते थे, बाद में उन्होंने मना कर दिया और कहने लगे कि उन्हें जनराज्य पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया जाए। जिस पर किसी ने अपनी सहमति नहीं दी। यही वजह है कि रविशंकर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।