लखनऊ में लामार्ट में आठवीं के छात्र से रैगिंग, स्कूल ने भी निकाला
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लखनऊ के प्रतिष्ठित ला-मार्टीनियर स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले आठवीं कक्षा सेक्शन-सी के छात्र यश प्रताप सिंह से रैगिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अभिभावक की शिकायत पर स्कूल प्रशासन ने आरोपी सीनियर्स पर कार्रवाई के बजाए यश को ही स्कूल से निकाल दिया। बृहस्पतिवार रात पिता एसपी सिंह, पत्नी सविता और बेटे के साथ गौतमपल्ली थाना पहुंचे और बेटे का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की। एसओ अंबर सिंह का कहना है कि शुक्रवार को स्कूल जाकर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
यश झांसी का रहने वाला है और उसके पिता एसपी सिंह ललितपुर में एसडीओ हैं। मां सविता ने बताया कि यश हॉस्टल की सेकेंड डॉरमेट्री में रहता था। इसमें कक्षा नौ व दस के छात्र भी रहते हैं। उनका आरोप है कि सीनियर छात्र बेटे के साथ मारपीट करते हैं। दस दिन पूर्व यश डॉरमेट्री के एक सीनियर छात्र का आई-पॉड प्रयोग कर रहा था इसी दौरान उसे नींद आ गई। नींद खुलने पर आई-पॉड गायब मिला। इस पर सीनियर ने उस पर 1800 रुपये देने का दबाव बनाया और उसकी पॉकेटमनी से 500 रुपये छीन लिए।
बाकी की रकम के लिए उसे धमकियां दीं। यश ने 18 सितंबर को वार्डन बेनेट से शिकायत की तो उन्होंने मॉनिटर अनस के पास भेजा। अनस ने शिकायत करने पर यश को मुर्गा बनाया और घुटनों के बल बैठाए रखा। पसीना-पसीना होने पर उसने यश को छोड़ा। बकौल सविता, इससे पूर्व 20 अगस्त को सीनियर छात्र ईशान पांडेय ने यश को किक मार दी थी। यश ने बचने की कोशिश की तो उसके दायें हाथ की अंगुली में चोट आई।
सविता ने स्कूल में शिकायत की फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। सविता ने वाइस प्रिंसिपल को पूरा वाकया बताया तो यश को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) थमा दी गई। सविता का कहना है कि स्कूल के हॉस्टल में सीनियर छात्र अघोषित रूप से रैगिंग कर रहे हैं।
दहशतजदा यश मां से बोला हॉस्टल में नहीं रहना
यश हॉस्टल में होने वाली शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से इतना दहशत में है कि उसने मां से वहां रहने से इनकार कर दिया। उसने हॉस्टल से निकालने की जिद की तो सविता ने स्कूल प्रशासन से संपर्क कर उसे डे-बोर्डिंग में रखने की बात कही। इस पर उसे मना कर दिया गया। सविता का कहना है कि बेटे की मानसिक दशा बहुत है। उसके मन में दहशत है। उसे फिर से पहले जैसा बनाने के लिए सुरक्षित पारिवारिक माहौल में रखकर काउंसिलिंग करानी पड़ेगी।
मेधावी था बेटा, सेहत बिगड़ी और पढ़ाई में भी पिछड़ा
सविता ने प्रतिष्ठित स्कूल के भीतर के माहौल की खुलकर धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने कहा कि बेटा पढ़ने में काफी तेज था। सातवीं में दाखिले के लिए स्कूल की कड़ी परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की थी। 75 बच्चों में यश को चौथा स्थान मिला था। लेकिन वहां के माहौल से सेहत बिगड़ गई और पढ़ाई में काफी पिछड़ गया है। हालिया परीक्षा परिणाम भी खराब आया है।
कहीं राहुल श्रीधर जैसा न हो बेटे का हाल...
सविता ने कहा कि बेटे को अक्सर चोटें लगती थीं। यह कैसे लगीं? उसने कभी बताया नहीं। बीते डेढ़ महीने से उसकी शिकायतें सुनकर कलेजा मुंह को आ जाता है। यह चोटें खेलकूद नहीं बल्कि सीनियर्स की प्रताड़ना व मारपीट से आती थीं। हॉस्टल व डे-बोर्डिंग के छात्रों के साथ रोजाना मारपीट व लड़ाई-झगड़ा होता है। स्कूल कभी परिवारीजनों को इसकी सूचना नहीं देता। यश के हाथ में चोट लगी तो भी उन्हें नहीं बताया गया। इसी लापरवाही के चलते यश को स्कूल से निकाल लिया। उन्हें डर था कि कहीं यश का हाल भी राहुल श्रीधर जैसा न हो। मालूम हो कि दो साल 9वीं के छात्र राहुल की स्कूल परिसर में स्थित कांस्टेंशिया बिल्डिंग से गिरकर संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
बच्चों की सुरक्षा और निगरानी का कोई इंतजाम नहीं
सविता का कहना है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी का कोई इंतजाम नहीं है। कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं जिससे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर गैर जिम्मेदारी का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों के झगड़ों के प्रति वह कतई गंभीर नहीं हैं। वहां बच्चों के झगड़ों पर कोई ध्यान नहीं देता।
झगड़े निपटाने की जिम्मेदारी हॉस्टल के ही मॉनीटर या हाउस मास्टर को सौंप दी गई है। यश ने जब प्रताड़ना की शिकायत की तो हाउस मास्टर ने उसे ही सजा दे दी।
सविता ने वाइस प्रिंसिपल से मिलकर असेंबली में मारपीट करने वाले बच्चों से माफी मंगवाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे बदमाश बच्चों के बीच एक अच्छा मैसेज जाएगा। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने उनका प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।