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Lucknow News: रेडियालॉजिस्ट लंबी छुट्टी पर, अल्ट्रासाउंड जांच ठप
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आलमबाग का 50 शैया संयुक्त अस्पताल।
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लखनऊ। आलमबाग स्थित चंदरनगर 50 बेड अस्पताल में दो माह से अल्ट्रासाउंड ठप है। अस्पताल आने वाले मरीजों को दवा तो मिल रही है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को डाॅक्टर दूसरे सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए भेज रहे हैं। सरकारी में वेटिंग मिलने पर गर्भवती व सामान्य मरीज निजी केद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं। आलमबाग 50 बेड हॉस्पिटल नवंबर 2023 से शुरू हुआ था। यहां 15 डॉक्टर तैनात हैं। गाइनी यूनिट, नेत्र, डेंटल, मेडिसिन समेत अन्य विभाग का संचालन हो रहा है। अस्पताल में रोजाना 500-600 से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से हर दिन 15 से 20 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच लिख रहे हैं, मगर यहां तैनात रेडियोलाॅजिस्ट गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की वजह से लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लोकबंधु व रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल रेफर कर रहे हैं। वहां पर पहले से अधिक लोड होने से मरीजों की जांच संभव नहीं हो पा रही है।
गर्भवती को बाहर से करानी पड़ी जांच
राजाजीपुरम की रहने वाली आठ माह की गर्भवती नेहा का इलाज अस्पताल से चल रहा है। डॉक्टर ने डेढ़ हफ्ते पहले अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने पर दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी गई। वहां एक हफ्ते बाद जांच के लिए बुलाया गया। नेहा ने मजबूरी में 1200 रुपये खर्च कर निजी केंद्र से जांच कराई।
पेट भी थी गांठ, निजी केंद्र से कराई जांच
पेट में गांठ होने पर उन्नाव से आई आस्था ने गाइनी यूनिट में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने खून से जुड़ी जांच के साथ अल्ट्रासाउंड जांच भी लिखी। खून से जुड़ी जांच अस्पताल में मुफ्त में हो गई, मगर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी केंद्र जाना पड़ा, जहां करीब एक हजार रुपये खर्च करने पड़े।
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सोनोलॉजिस्ट को किया अटैच, मगर नहीं मिली राहत
चंदरनगर सीएचसी में तैनात एक सोनोलॉजिस्ट को अस्पताल से अटैच किया गया है। जो हफ्ते में दो दिन जांच करने आ रही हैं। इनके जरिये सिर्फ गर्भवती की जांच हो रही है। सामान्य मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्र पर जाना पड़ रहा है।
Iअस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट असाध्य बीमारी की वजह से लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। दूसरे रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन व आला अफसरों को पत्र लिखा गया है। वहीं, गर्भवती की जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट को अटैच किया है। I
I- डॉ. आनंद त्रिपाठी, सीएमएसI
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गर्भवती को बाहर से करानी पड़ी जांच
राजाजीपुरम की रहने वाली आठ माह की गर्भवती नेहा का इलाज अस्पताल से चल रहा है। डॉक्टर ने डेढ़ हफ्ते पहले अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने पर दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी गई। वहां एक हफ्ते बाद जांच के लिए बुलाया गया। नेहा ने मजबूरी में 1200 रुपये खर्च कर निजी केंद्र से जांच कराई।
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पेट भी थी गांठ, निजी केंद्र से कराई जांच
पेट में गांठ होने पर उन्नाव से आई आस्था ने गाइनी यूनिट में डॉक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने खून से जुड़ी जांच के साथ अल्ट्रासाउंड जांच भी लिखी। खून से जुड़ी जांच अस्पताल में मुफ्त में हो गई, मगर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी केंद्र जाना पड़ा, जहां करीब एक हजार रुपये खर्च करने पड़े।
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सोनोलॉजिस्ट को किया अटैच, मगर नहीं मिली राहत
चंदरनगर सीएचसी में तैनात एक सोनोलॉजिस्ट को अस्पताल से अटैच किया गया है। जो हफ्ते में दो दिन जांच करने आ रही हैं। इनके जरिये सिर्फ गर्भवती की जांच हो रही है। सामान्य मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्र पर जाना पड़ रहा है।
Iअस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट असाध्य बीमारी की वजह से लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। दूसरे रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन व आला अफसरों को पत्र लिखा गया है। वहीं, गर्भवती की जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट को अटैच किया है। I
I- डॉ. आनंद त्रिपाठी, सीएमएसI