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Lucknow News: रैबीज या हिंसक कुत्तों को फिर मिलेगी सुख मृत्यु
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शहर में आवारा कुत्ते।
लखनऊ। हिंसक और रैबीजग्रस्त आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम अब ऐसे कुत्तों को मार सकेगा जो मानव जीवन के लिए खतरा बन चुके हैं। करीब 25 साल पहले तक इस तरह के कुत्तों को ‘सुख मृत्यु’ देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में इस पर रोक लग गई थी। शहर में वर्तमान में करीब एक लाख आवारा कुत्ते हैं, मगर इनके लिए पर्याप्त शेल्टर होम नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने पहले शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में नए आदेश से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि वर्ष 2001 से पहले रैबीजग्रस्त या अत्यधिक हिंसक कुत्तों को समिति की संस्तुति के बाद सुख मृत्यु दी जाती थी। रैबीज का वायरस दिमाग पर असर डालने के बाद कुत्तों को आक्रामक बना देता है और ऐसे कुत्ते सामान्यतः चार-पांच दिन में स्वत: मर जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें पैंटोथल सोडियम या मैगसल्फ के इंजेक्शन से दर्दरहित मृत्यु दी जाती थी। एक और तरीका फांसी देने का भी था। इसके लिए नगर निगम के कैटल कैचिंग विभाग में जल्लाद की भी तैनाती होती थी, लेकिन पिछले 25 वर्षों से यह व्यवस्था बंद है।
उन्होंने बताया कि कुत्तों को मारने का निर्णय एक समिति करती थी, जिसमें पीपुल्स फॉर एनिमल बोर्ड, पशुपालन विभाग, नगर निगम और एनजीओ के प्रतिनिधि शामिल रहते थे। जांच के बाद समिति की अनुमति मिलने पर ही कार्रवाई होती थी।
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जून से कुत्तों में लगेगी माइक्रोचिप
नगर निगम जून से आवारा कुत्तों में माइक्रोचिप लगाने की योजना शुरू करेगा। नसबंदी के लिए लाए जाने वाले प्रत्येक कुत्ते में चावल के दाने के आकार की चिप इंजेक्शन के जरिये लगाई जाएगी। इसमें कुत्ते का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा, जैसे पकड़ने की तारीख, नसबंदी, रैबीज टीकाकरण और शिकायतों का विवरण। स्कैनर से करीब 100 मीटर दूर से ही चिप पढ़ी जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, जिन कुत्तों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलेंगी, उनकी पहचान हिंसक कुत्तों के रूप में की जा सकेगी।
अभी यह है नियम
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत फिलहाल आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए केवल नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का प्रावधान है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। नगर निगम का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से कुत्तों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। शहर में अभी केवल एक नसबंदी केंद्र है, जबकि दूसरा केंद्र निर्माणाधीन है।
Iसुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। हिंसक कुत्तों को मारने का फैसला समिति की अनुमति के बाद ही लिया जाएगा।I
I- डॉ. अभिनव वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगमI
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नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि वर्ष 2001 से पहले रैबीजग्रस्त या अत्यधिक हिंसक कुत्तों को समिति की संस्तुति के बाद सुख मृत्यु दी जाती थी। रैबीज का वायरस दिमाग पर असर डालने के बाद कुत्तों को आक्रामक बना देता है और ऐसे कुत्ते सामान्यतः चार-पांच दिन में स्वत: मर जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें पैंटोथल सोडियम या मैगसल्फ के इंजेक्शन से दर्दरहित मृत्यु दी जाती थी। एक और तरीका फांसी देने का भी था। इसके लिए नगर निगम के कैटल कैचिंग विभाग में जल्लाद की भी तैनाती होती थी, लेकिन पिछले 25 वर्षों से यह व्यवस्था बंद है।
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उन्होंने बताया कि कुत्तों को मारने का निर्णय एक समिति करती थी, जिसमें पीपुल्स फॉर एनिमल बोर्ड, पशुपालन विभाग, नगर निगम और एनजीओ के प्रतिनिधि शामिल रहते थे। जांच के बाद समिति की अनुमति मिलने पर ही कार्रवाई होती थी।
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जून से कुत्तों में लगेगी माइक्रोचिप
नगर निगम जून से आवारा कुत्तों में माइक्रोचिप लगाने की योजना शुरू करेगा। नसबंदी के लिए लाए जाने वाले प्रत्येक कुत्ते में चावल के दाने के आकार की चिप इंजेक्शन के जरिये लगाई जाएगी। इसमें कुत्ते का पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा, जैसे पकड़ने की तारीख, नसबंदी, रैबीज टीकाकरण और शिकायतों का विवरण। स्कैनर से करीब 100 मीटर दूर से ही चिप पढ़ी जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, जिन कुत्तों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलेंगी, उनकी पहचान हिंसक कुत्तों के रूप में की जा सकेगी।
अभी यह है नियम
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत फिलहाल आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए केवल नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का प्रावधान है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। नगर निगम का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से कुत्तों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। शहर में अभी केवल एक नसबंदी केंद्र है, जबकि दूसरा केंद्र निर्माणाधीन है।
Iसुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। हिंसक कुत्तों को मारने का फैसला समिति की अनुमति के बाद ही लिया जाएगा।I
I- डॉ. अभिनव वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगमI

शहर में आवारा कुत्ते।

शहर में आवारा कुत्ते।

शहर में आवारा कुत्ते।