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दफन हो गया भाजपा नेता कृष्णानंद राय की हत्या का राज, पर सवाल अब भी कायम, हत्यारा कौन?

Thu, 04 Jul 2019 02:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 04 Jul 2019 02:52 PM IST
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Question of Krishnanand Rai murder remains even after final verdict.
भाजपा नेता कृष्णानंद राय - फोटो : amar ujala

आज से 14 साल पहले 29 नवंबर की वह शाम जब पूर्वांचल एके 47 की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। हत्या भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की हुई थी और आरोप बाहुबली मुख्तार अंसारी और उनके साथियों पर लगा था। 14 साल बाद फैसला आया तो मुख्तार और उसके साथियों को बरी कर दिया गया। यानी सवाल अब भी कायम की कृष्णानंद को किसने मारा?

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दरअसल पूर्वांचल में गैंगवार का इतिहास काफी पुराना है। गैंगवार में अब तक कई जानें जा चुकी हैं। गैंगवार में पहली बार एके-47 का इस्तेमाल कृष्णानंद राय की हत्या में किया गया। जिसमें कृष्णानंद के अलावा 6 अन्य की मौत हो गई। इस मामले में दो प्रमुख गवाह थे शशिकांत राय और मनोज गौड़।

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इन दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अन्य जो गवाह थे वह मुकर गए जिससे कृष्णानंद को न्याय मिलने की उम्मीद धूमिल होती चली गई। और अब अदालत का फैसला आया तो सब के सब आरोपी बरी हो गए।

कृष्णानंद राय ने की थी बृजेश की राजनीतिक मदद: राजनीति की वजह से मुख्तार का कद बढ़ चुका था। मुख्तार का मुकाबला करने के लिए बृजेश ने भी राजनीति का ही सहारा लिया। इसके लिए बृजेश ने कृष्णानंद राय की मदद ली। कृष्णानंद राय की जब हत्या हुई उस समय मुख्तार जेल में बंद था। इस हत्या कांड में मुन्ना बजरंगी का भी नाम आया। लेकिन मुन्ना बजरंगी की बीते वर्ष बागपत जेल के अंदर हत्या कर दी गई।

बृजेश और मुख्तार के बीच गैंगवार में गई थी कृष्णानंद राय की जान

Question of Krishnanand Rai murder remains even after final verdict.
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला

कृष्णानंद राय की हत्या के पीछे माफिया मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के बीच गैंगवार को माना जाता है। 1996 तक मुख्तार अंसारी का जरायम की दुनिया में बड़ा नाम हो गया था। साथ में वह अपने परिवार की विरासत यानी सियासत को भी कायम रखने के लिए राजनीति में आए और 1996 में पहली बार विधायक बने।

मुख्तार सत्ता के  सहारे बृजेश सिंह पर हावी होने लगे। बृजेश के साथ उनके करीबी भी मुख्तार के निशाने पर आ गए। एक दौर ऐसा भी आया जब बृजेश ने मुख्तार को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।

जुलाई 2001 में गाजीपुर के उसरी चट्टी में मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हुआ जिसमें मुख्तार तो बच गया लेकिन उसके तीन साथी मारे गए। इस गैंगवार में मुख्तार ने भी दो हमलावरों को मार गिराया था।

कौन है मुख्तार अंसारी

Question of Krishnanand Rai murder remains even after final verdict.

यूपी के गाजीपुर में जन्मे मुख्तार अंसारी का परिवार प्रदेश की सियासत से जुड़ा रहा है। मुख्तार के दादा अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। मुख्तार के पिता एक कम्युनिस्ट नेता थे। 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार अंसारी का नाम आया।

हालांकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई थी। 1990 का दशक मुख्तार अंसारी के लिए बड़ा अहम था। छात्र राजनीति के बाद जमीनी कारोबार और ठेकों की वजह से वह जरायम की दुनिया में कदम रख चुके थे।

पूर्वांचल के कई जिलों में मुख्तार के नाम की तूती बोलने लगी थी। 1995 में मुख्तार अंसारी ने सियासत में कदम रखा। 1996 में विधानसभा का चुनाव हुआ तो वह चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंच गए। उसके बाद से वह लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं।

2002 के चुनाव में कृष्णानंद राय ने मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी को हरा दिया था। अक्तूबर 2005 में मऊ में हुई संप्रदायिक हिंसा में भी मुख्तार अंसारी पर लोगों को उकसाने का आरोप लगा। जिसके बाद मुख्तार ने आत्मसमर्पण कर दिया था।

बसपा और सपा की राजनीति

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2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए बसपा के टिकट पर वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से हार गए।

2010 में मुख्तार अंसारी पर राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगा। मौर्य मन्नत सिंह नामक एक स्थानीय ठेकेदार की हत्या का गवाह था। इसी आधार पर बसपा ने दोनों भाइयों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

मुख्तार ने इसके बाद कौमी एकता दल का गठन किया। 2012 के चुनाव में मुख्तार और उनके भाई सिगबतुल्लाह अंसारी चुनकर विधानसभा पहुंचे।

ये हैं हत्याकांड के मृतक व आरोपी

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कृष्णानंद राय
श्यामा शंकर राय
रमेश राय
निर्भय नारायण राय
पुलिस का गनर अखिलेश कुमार राय
सरकारी चालक मुन्ना यादव
शेष नाथ सिंह

ये हैं हत्याकांड के कुल आरोपी
1. एजाज उल हक-बरी
2. अफजाल अंसारी-बरी
3. मुख्तार अंसारी-बरी
4. मंसूर अंसारी-बरी
5. अता उर्र रहमान-भगोड़ा
6. मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह-मृत
7. फिरदौस उर्फ जावेद-मृत
8. संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा-बरी
9. राकेश पांडे-बरी
10. रामू मल्लाह-बरी
11. विश्वास उर्फ नेपाली-भगोड़ा
12. जफर उर्फ चंदा-भगोड़ा
13. अफरोज खान उर्फ चुन्नू-आरोप मुक्त

यहां देखें, कृष्णानंद राय हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम

Question of Krishnanand Rai murder remains even after final verdict.

- 29 नवंबर 2005- भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय और छह अन्य की हत्या।
- 21 फरवरी 2006- उत्तर प्रदेश पुलिस ने अदालत में पहला आरोपपत्र दायर किया। इसमें अफजल हक, अफजल अंसारी, प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी, अताउर्र रहमान और फिरदोस को नामजद किया गया था।

- 15 मार्च 2006- उत्तर प्रदेश ने दूसरा आरोपपत्र मुख्तार अंसारी के खिलाफ दायर किया।
- मई 2006- कृष्णानंद राय की पत्नी अल्का राय की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का सीबीआई जांच का आदेश।
 
- 30 अगस्त 2006- मामले में तीसरा आरोपपत्र सीबीआइ ने दायर किया, जिसमें संजीव माहेश्वरी को भी आरोपित किया गया।
- दिसंबर 2006- सीबीआइ ने चौथा आरोपपत्र दायर कर राकेश पांडे और रामू मल्लाह को नामजद किया।

- 20 मार्च 2007- पांचवां आरोपपत्र मंसूर अंसारी के खिलाफ दायर किया गया।
- 22 अप्रैल 2013- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर की।
- 15 मार्च 2014- छठा आरोपपत्र मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दायर किया गया।
- 3 जुलाई 2019- अदालत ने आरोपितों को बरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।

हत्या के बाद बलिया से बनारस तक दिखा था गुस्सा

Question of Krishnanand Rai murder remains even after final verdict.

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बलिया से लेकर मऊ, गाजीपुर और बनारस तक उनके समर्थकों में एक हफ्ते तक जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला था। नृशंस हत्याकांड के विरोध में समर्थकों ने जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की थी। वहीं, वाराणसी के भी कई इलाकों में जमकर उपद्रव किया था। समर्थकों का आक्रोश देखते हुए कई निजी स्कूल और कॉलेज कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके साथ ही गाजीपुर और बनारस में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाना अंतर्गत सियाड़ी गांव में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों पर एके-47 जैसे अत्याधुनिक असलहों से लगभग 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। सातों लोगों का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू लाया जाने लगा तो भाजपा विधायक के समर्थक उग्र हो गए थे और जगह-जगह तोड़फोड़ व हिंसा की गई थी।

समर्थक पोस्टमार्टम कराने के लिए ही नहीं तैयार हो रहे थे लेकिन किसी तरह से पुलिस ने उन्हें समझा कर मनाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां निकाली गई थीं। पोस्टमार्टम के बाद भाजपा विधायक और अन्य छह लोगों का शव गाजीपुर जिला स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया था।

भाजपा विधायक की अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए निकली तो पांच किलोमीटर से ज्यादा लंबा जनसैलाब उमड़ा था। भाजपा विधायक की शवयात्रा के चलते वाराणसी-गाजीपुर मार्ग दिन भर जाम की जद में रहा था।

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