खत्म नहीं हुआ पीडब्ल्यूडी का तेल संकट

अजीत बिसारिया/लखनऊ Updated Thu, 24 Oct 2013 10:21 AM IST
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pwd is still in trouble over oil crisis

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ईंधन न होने से कई दिन तक खड़े रहे पीडब्ल्यूडी के वाहन बुधवार को सड़क पर दौड़े जरूर, लेकिन इनके चक्के कभी भी फिर थम सकते हैं।
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वजह, न तो शासन ने पुनरीक्षित बजट में इस मद में कोई धनराशि दी और न ही दूसरे मदों की बचत को ईंधन पर खर्च करने की अभी तक इजाजत दी है।
विभागाध्यक्ष चित्रा स्वरूप ने अपने विवेकाधीन कोष एआर-3054 से पेट्रोल पंप मालिक को 30 लाख रुपये का भुगतान करके फिलहाल यह संकट टाला भर है।
कई दिनों तक पीडब्ल्यूडी के डेढ़ सौ से ज्यादा वाहन मुख्यालय परिसर में खड़े रहे। पिछले चार महीने में पेट्रोल पंप से 70 लाख रुपये का पेट्रोल लिया गया, मगर भुगतान नहीं किया गया।

नतीजतन, पंप मालिक ने तेल देने से मना कर दिया। दरअसल, पीडब्ल्यूडी में ईंधन का सालाना खर्च साढ़े तीन करोड़ रुपये है लेकिन बजट में सिर्फ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।

विभागीय अफसरों को उम्मीद थी कि पुनरीक्षित बजट में बाकी धनराशि मिल जाएगी लेकिन इसमें एक धेला भी नहीं दिया गया। 15 अक्तूबर तक 2.30 करोड़ रुपये का ईंधन खर्च हो चुका था और भुगतान सिर्फ 1.60 करोड़ रुपये का ही किया जा सका।

इसमें से 90 लाख रुपये शासन से मिले थे जबकि बाकी धनराशि मरम्मत और दूसरे मदों की बचत आदि से जुटाई गई थी। लेकिन दूसरे मदों की धनराशि का ईंधन मद में इस्तेमाल करने पर वित्त विभाग ने आपत्ति लगा दी।

इसी का नतीजा हुआ कि पिछले चार महीने से पेट्रोल पंप मालिक को कोई भुगतान नहीं किया जा सका। जब उसने तेल देने से इन्कार कर दिया तो आनन-फानन में पुनर्विनियोग मद (दूसरे मदों की बचत से इकट्ठा हुई रकम) से धनराशि देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।

हालांकि, विभागीय सूत्रों के मुताबिक शासन ने अभी तक इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति नहीं दी है।

उधर, वाहन खड़े हो जाने से विभागीय कामकाज प्रभावित होने लगा। इसलिए प्रमुख अभियंता (विकास) और विभागाध्यक्ष चित्रा स्वरूप ने एनुअल रिपेयर-3054 मद से पेट्रोल पंप मालिक को 30 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।

अब ईंधन तो मिलने लगा है, मगर जानकारों का कहना है कि पुनर्विनियोग मद की धनराशि इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली तो यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रह पाएगी।
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