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अपात्रों को भी प्रमोशन और वेतन वृद्धि, ऑडिट में खुलासा
Fri, 07 Jun 2019 01:24 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: manoj tiwari
Updated Fri, 07 Jun 2019 01:24 AM IST
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- फोटो : डेमो
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित कोर्सों की स्थिति यूं ही खराब नहीं हुई है। पूर्व के वर्षों में इन कोर्सों में की गई मनमानी नियुक्तियां व अपनों को रेवड़ी बांटने के कारण ही आज ये कोर्स बंद होने के कगार पर हैं। हाल में ऑडिट में सामने आया है कि वर्ष 2016-17 में स्ववित्तपोषित कोर्स के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न सिर्फ प्रमोशन बल्कि वेतन वृद्धि भी दे दी है। ऑडिट विभाग ने इसमें लगभग 9 करोड़ रुपये के खर्च पर आपत्ति की है, जिसके बाद से विवि के अधिकारियों को इसका जवाब नहीं सूझ रहा है।
विवि में पूर्व के वर्षों में खाली पदों के सापेक्ष स्ववित्तपोषित कोर्सों में काफी संख्या में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की गईं। हाल के कुछ वर्षों में जब विवि की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी तो इसके कारण खोजे जाने लगे। पता चला कि कई विभागों में जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। विवि सूत्रों के अनुसार प्रदेश के ऑडिट विभाग ने भी इस पर आपत्ति की है। विभाग की ओर से वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट विवि को भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि नियम के विपरीत प्रमोशन और एसीपी का लाभ भी दे दिया गया। जबकि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिल सकते हैं। इस पर लगभग 9 करोड़ रुपये की आपत्ति की गई है। अब विवि प्रशासन इस आपत्ति के निस्तारण का रास्ता खोज रहा है। हालांकि सूत्रों के अनुसार इस मामले में गाज संबंधित कर्मचारियों पर ही गिरनी तय है। उनसे रिकवरी भी की जा सकती है।
शिक्षकों का भी लेखा-जोखा नहीं
विवि में स्ववित्तपोषित कोर्सों में मनमानी हर स्तर पर हो रही है। हालत ये है कि इन कोर्सों के लिए रखे जाने वाले शिक्षकों के वेतन, अन्य लाभ आदि की पूरी जानकारी विवि के वित्त विभाग के पास भी नहीं है। विभाग स्तर पर ही इसका निर्धारण व भुगतान कर दिया जाता है। अब इससे जुड़ी जानकारी प्राप्त कर नियम भी बनाए जा रहे हैं।
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सुधार के लिए कर रहे हैं बदलाव
साल 2016-17 में स्ववित्तपोषित कोर्सों के कर्मचारियों को मनमाने प्रमोशन व एसीपी देने की ऑडिट आपत्ति संज्ञान में आई है। इस पर निर्णय के लिए मामला कार्य परिषद में रखा जाएगा। गड़बड़ियों में सुधार व कोर्सों की व्यवस्था सुधारने के लिए कई बदलाव भी किए जा रहे हैं।
प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि
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विवि में पूर्व के वर्षों में खाली पदों के सापेक्ष स्ववित्तपोषित कोर्सों में काफी संख्या में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति की गईं। हाल के कुछ वर्षों में जब विवि की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी तो इसके कारण खोजे जाने लगे। पता चला कि कई विभागों में जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। विवि सूत्रों के अनुसार प्रदेश के ऑडिट विभाग ने भी इस पर आपत्ति की है। विभाग की ओर से वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट विवि को भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि नियम के विपरीत प्रमोशन और एसीपी का लाभ भी दे दिया गया। जबकि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिल सकते हैं। इस पर लगभग 9 करोड़ रुपये की आपत्ति की गई है। अब विवि प्रशासन इस आपत्ति के निस्तारण का रास्ता खोज रहा है। हालांकि सूत्रों के अनुसार इस मामले में गाज संबंधित कर्मचारियों पर ही गिरनी तय है। उनसे रिकवरी भी की जा सकती है।
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शिक्षकों का भी लेखा-जोखा नहीं
विवि में स्ववित्तपोषित कोर्सों में मनमानी हर स्तर पर हो रही है। हालत ये है कि इन कोर्सों के लिए रखे जाने वाले शिक्षकों के वेतन, अन्य लाभ आदि की पूरी जानकारी विवि के वित्त विभाग के पास भी नहीं है। विभाग स्तर पर ही इसका निर्धारण व भुगतान कर दिया जाता है। अब इससे जुड़ी जानकारी प्राप्त कर नियम भी बनाए जा रहे हैं।
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सुधार के लिए कर रहे हैं बदलाव
साल 2016-17 में स्ववित्तपोषित कोर्सों के कर्मचारियों को मनमाने प्रमोशन व एसीपी देने की ऑडिट आपत्ति संज्ञान में आई है। इस पर निर्णय के लिए मामला कार्य परिषद में रखा जाएगा। गड़बड़ियों में सुधार व कोर्सों की व्यवस्था सुधारने के लिए कई बदलाव भी किए जा रहे हैं।
प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि