सात समंदर पार के छात्रों ने संगीत से समां बांधा
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संगीत के मोहपाश में बंधकर सात समंदर पार से आए छात्रों ने विश्व संगीत
हॉल के भीतर विदेशी छात्रों की गायन, वादन, नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ बाहर उमड़-घुमड़ कर आए मेघों ने संगीत के जादू का अहसास कराया।
विश्व संगीत दिवस पर मंगलवार को भातखण्डे संगीत सम विश्वविद्यालय में आयोजित संगीत कार्यक्रम में विदेशी छात्रों ने भी अपनी कला दिखाई।
कार्यक्रम का आगाज
श्रीलंका के संजय बालाधनधनी ने राग शुद्ध कल्याण पर गायन से किया। तबले पर
लोकप्रिय सिखिरदन और तानपुरे पर पुनसंदा मियसी की संगत के साथ संजय ने
‘यहां बोलन लागे पपिहरा...’ सुनाया।
पं. रवींद्र नाथ मिश्र की शिष्या
बेलारूस की हन्ना पाशकेविच ने तबले पर ‘तिनक तिन धा...’ पर हुनर दिखाया।
श्रीलंका के हिमक कौचित्य ने राग जोग विलंबित लय में प्रस्तुति दी। करीब 20
मिनट की प्रस्तुति को लोगों ने खूब सराहा। इनके साथ तबले पर नरेंद्र
गुनरत्ने, हारमोनियम पर के. अंजन सेनारत्न ने मंच साझा किया।
अंतिम
प्रस्तुति में भरतनाट्यम नृत्य पर नुवंती सेना लेगा सराही गई। इस मौके पर
भातखंडे के डॉ. कमलेश दुबे, शिक्षक नृत्यांगना कुमकुम धर, डॉ. मनोज कुमार
मिश्र, सृष्टि माथुर, डॉ. ऊषा बनर्जी समेत तमाम शिक्षक मौजूद रहे।