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प्रो. राधा कृष्ण धीमान बने एसजीपीजीआई के निदेशक, सोमवार को ग्रहण कर सकते हैं कार्यभार
Sat, 25 Jan 2020 09:20 PM IST
Vikas Kumar
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 25 Jan 2020 09:20 PM IST
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प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमान
- फोटो : सोशल मीडिया
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमान को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) का निदेशक नियुक्त किया है। वह पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़ में हैपटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष हैं। इनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष या 65 वर्ष की उम्र पूरी होने तक के लिए की गई है। प्रो. धीमान सोमवार को कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं।
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एसजीपीजीआई निदेशक के पद के लिए अक्तूबर से चयन प्रक्रिया शुरू हो गई थी। तत्कालीन निदेशक प्रो. राकेश कपूर का कार्यकाल खत्म होने और उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी को कार्यभार सौंपा गया। संस्थान के 11 प्रोफेसरों भी निदेशक पद के लिए आवेदन किया था। अंतिम दौर में दो प्रोफेसरों के बीच जोर आजमाइश चली। टॉप तीन प्रोफेसरों की सूची में संस्थान के एक प्रोफेसर ही पहुंच पाए। हालांकि, निदेशक पद का ताज प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमान के सिर सजा। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ से रिलीव होने के बाद सोमवार शाम या मंगलवार को लखनऊ पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
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प्रो. धीमान ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि पीजीआई में हेपेटिक व बिलेरी डिजीज की सुविधाओं को विश्व स्तरीय बनाया जाए। लिवर प्रत्यारोपण सहित इस विधा से जुड़ी विशेषज्ञ सुविधाओं का विस्तार हो। अन्य विभागों में भी अत्याधुनिक सुविधाएं लाने का प्रयास होगा, जिससे पीजीआई के प्रति विश्वास कायम रहे। उन्होंने बताया कि वह पीजीआई में छात्र के रूप में रह चुके हैं। यहां के कर्मचारियों से लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों तक से संबंध हैं। वह सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करेंगे। कहा कि मरीजों के इलाज के साथ चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने का भी प्रयास होगा। इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए नव चिकित्सा विशेषज्ञ तैयार किया जाएगा।
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पीजीआई से पढ़ाई की, अब निभाएंगे निदेशक की जिम्मेदारी
सहारनपुर जिले के मूल निवासी डॉ. राधा कृष्ण धीमान ने 1984 में केजीएमयू (केजीएमसी) से एमबीबीएस और 1987 में एमडी किया। संजय गांधी पीजीआई में 1988 में डीएम गैस्ट्रोलॉजी में एडमिशन लिया। इसके बाद नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन साइंस से एफएएमएस और अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोलॉजी यूएसए से एफएसीजी कोर्स किया। उनके नाम करीब 150 से अधिक पब्लिकेशन हैं। वे हेपेटिक और बिलेरी डिजीज के विशेषज्ञ माने जाते हैं।