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..तो इसलिए स्मृति और विश्वास पर हमलावर हैं प्रियंका

Wed, 30 Apr 2014 01:50 AM IST
रमाकांत तिवारी/ अमर उजाला, लखनऊ
रमाकांत तिवारी/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 30 Apr 2014 01:50 AM IST
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priyanka aggression against smriti and vishwas

रायबरेली में कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन ऐसा क्या है जो प्रियंका को बार बार हमलावर बना रहा है।

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जी हां, इसका कारण है राहुल गांधी की घेरेबंदी।

राहुल गांधी की हैट्रिक में भाजपा की स्मृति ईरानी और ‘आप’ के कुमार विश्वास रोड़ा बनकर खड़े हैं।

हालत यह है कि साढ़े तीन दशक में पहली बार प्रियंका वाड्रा को अमेठी के विकास कार्यों का हिसाब देना पड़ रहा है।

पूर्व के चुनावों में आमतौर पर मैदान में उतरने वाले विपक्षी प्रत्याशी व दल के नाम से भी परहेज करने वाली प्रियंका स्मृति ईरानी और कुमार विश्वास पर हमलावर हैं।

सोनिया भी कई बार आईं

priyanka aggression against smriti and vishwas

कभी अमेठी की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा ने यहां डेरा डाल दिया है। अमेठी में ‘आप’ के कुमार विश्वास और भाजपा की स्मृति ईरानी की घेराबंदी ने कांग्रेसियों की नींद उड़ा दी है।

चुनाव की अधिसूचना से पहले ही डॉ. संजय सिंह को राज्यसभा भेजकर और कई कांग्रेसियों की अहम पदों पर ताजपोशी कर राहुल की राह आसान करने में जुटी कांग्रेस ने अब अमेठी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

सोनिया गांधी की जनसभा के बाद ताबड़तोड़ हो रहे प्रियंका वाड्रा के दौरे इस बात की चुगली कर रहे हैं कि पार्टी इस बार अमेठी को लेकर पहले की तरह मुतमइन नहीं है।

गांधी फैमिली को न केवल यहां ताबड़तोड़ दौरे करने पड़ रहे हैं बल्कि पारिवारिक रिश्ता बताने के साथ विकास कार्यों को भी गिनाना पड़ रहा है।

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स्मृति और विश्वास हैं चुनौती

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पूर्व के चुनावों में मैदान में उतरे प्रत्याशियों और दलों के नाम से भी परहेज करने वाली कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका वाड्रा को स्मृति ईरानी और कुमार विश्वास पर हमलावर होना पड़ रहा है।

राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एंट्री के बाद से अमेठी में सक्रिय रहने और यहां से तीन चुनाव (एक उप चुनाव समेत) लड़ने वाले गांधी फैमिली के करीबियों में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा ने अमेठी में डेरा डाल दिया है।

कैप्टन सतीश शर्मा को चुनाव के हर हथकंडे में माहिर माना जाता है। 1999 में सोनिया गांधी के अमेठी से मैदान में उतरने के बाद अमेठी छोड़ने वाले कैप्टन सतीश शर्मा का वैसे तो चुनाव के दौरान यहां आना-जाना लगा रहता है लेकिन पहली बार वे चुनाव के काफी पहले अमेठी में जम गए हैं।

‘आप’ और भाजपा प्रत्याशी राहुल गांधी के मुकाबले यहां क्या कर पाएंगे यह भले ही नतीजे पर निर्भर हो लेकिन कांग्रेस की बेचैनी साफ दिख रही है।

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