जेल में बंदियों के बीच घामासान, 100 पहुंचे अस्पताल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्चस्व को लेकर जिला कारागार में शनिवार को बंदियों के बीच जमकर मारपीट हुई। इन्हें काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इससे करीब 100 बंदी घायल हो गए। इनमें 15 की हालत गंभीर बताई जा रही है। बंदियों का आरोप है कि बंदीरक्षकों ने इस दौरान कंबल और रजाइयों को आग लगा दी। छह एलसीडी और फर्नीचर तोड़ डाले।
सुबह करीब नौ बजे बैरक नंबर 17 में निरुद्ध बंदी उदयभान सिंह उर्फ बबलू प्रधान अन्य बंदियों के साथ बैरक से बाहर निकला था। इसी बीच उसने बैरक नंबर 11 में निरुद्ध बंदी सोनू सिंह पर हमला कर दिया।
सोनू को बचाने दौड़े बंदी को भी उदयभान ने जमकर पीटा। तभी बैरक नंबर 12 के बंदी लामबंद होकर सोनू सिंह को बचाने पहुंच गए।
पुलिस को कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
दोनों बैरकों के बंदियों के बीच मारपीट शुरू हो गई। हालात बेकाबू होते देख जेल प्रशासन ने जिला प्रशासन को जानकारी दी। इस बीच कारागार के बंदी रक्षक भी वहां पहुंच गए।
इस दौरान एसडीएम अमित सिंह व सीओ सिटी राम औतार कर्णवाल पुलिस टीम व वज्र वाहन के साथ पहुंच गए। पुलिस ने बल प्रयोग कर कड़ी मशक्कत के बाद हालात को नियंत्रित किया।
इस दौरान 100 बंदी घायल हो गए। घायलों को जिला कारागार के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वर्चस्व को लेकर जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को काबू करने के लिए शनिवार को बंदी रक्षक और लंबरदारों ने जो बर्बरता मचाई उसने 25 जून 2007 को हुए जेलकांड की याद ताजा कर दी।
उस घटना में दो बंदीरक्षकों समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। शनिवार को भी बंदियों ने जेल का नजारा कमोबेश वैसा ही देखा।