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छात्रवृत्ति घोटाला: 300 रुपये तक के गबन के आरोपी बने प्रधानाचार्य, ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव

Sun, 13 Oct 2019 01:59 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 13 Oct 2019 01:59 AM IST
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Principal, Pradhan and panchayat secretary appointed for embezzlement of up to 300 rupees
scholarship - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। अभी तक दर्ज 13 ब्लॉक की एफआईआर में कुछ स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने एक लाख या उससे अधिक का घपला किया है जबकि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जो 300 रुपये और 600 रुपये का हिसाब नहीं दे पाए, वहां के भी प्रधानाचार्य, ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव आरोपी बनाए गए हैं।
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 आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें हसनगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रानी खेड़ा जागीर के प्रधान शिक्षक ने जांच अधिकारी को बताया कि 2006-07 में पिछड़ी जाति के 4 छात्रों के लिए 300 रुपये के हिसाब से 1200 रुपये स्कूल को मिले थे। इसमें से एक छात्र का रिकार्ड नहीं मिला। 
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यानी 300 रुपये का हिसाब स्कूल नहीं दे पाया। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय आदमपुर भांसी में 32 छात्रों के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण ने 9600 रुपये दिए थे, लेकिन स्कूल के 30 छात्रों को ही वितरित किए गए। 600 रुपये का हिसाब स्कूल नहीं दे पाया। सबसे अधिक छात्रवृत्ति का घपला सिकंदरपुर सरौसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में 1,32,400 रुपये और फतेहपुर चौरासी के तकिया विद्यालय में 1,11,400 रुपये का हुआ। 
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छात्रवृत्ति घोटाले में 47 लाख रुपये की हेराफेरी

ईओडब्ल्यू ने शासन के निर्देश पर 2001 से 2010 के बीच उन्नाव में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच की थी। उन्नाव में कुल 16 ब्लॉक हैं जिसमें से सुमेरपुर, औरस और मियांगंज छोड़कर सभी अन्य 13 ब्लॉक में हुए घोटाले की एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इन ब्लॉकों के कुल 280 स्कूलों के प्रधानाचार्य, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और समाज कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों और बाबुओं ने मिलकर 47 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी की थी।
 
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