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सीएम के आदेश के एक माह बाद हटे प्रधान मुख्य वन संरक्षक
Wed, 04 Dec 2019 01:03 PM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 04 Dec 2019 01:03 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
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बसपा शासनकाल में सोनभद्र में जेपी ग्रुप को वन विभाग की 1083 हेक्टेयर जमीन देने के मामले में जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू हो गई है। शासन ने प्रमुख सचिव वन कल्पना अवस्थी और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष पवन कुमार को हटा दिया है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 7 नवंबर को ही पवन कुमार को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन कल्पना अवस्थी ने जांच रिपोर्ट आने तक पवन को बरकरार रखने की वकालत की थी।
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अमर उजाला’ इस मामले को वर्ष 2014 से ही प्रमुखता से उठाता रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार से मामले की जांच करवाई थी। रेणुका कुमार ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी। अब प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग को वन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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वहीं, सीएम ने पवन के तत्काल बाद वरिष्ठतम आईएफएस अफसर को प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का आदेश दिया। इसके बाद वन निगम के एमडी राजीव गर्ग को वन विभाग के विभागाध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
रेणुका कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई...
जेपी को वन भूमि देने का मामला सामने आने के बाद सीएम योगी ने पवन को हटाने का आदेश दिया था। मगर, प्रमुख सचिव वन कल्पना ने अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार की रिपोर्ट आने तक पवन को न हटाए जाने की वकालत की थी। इससे पवन पद पर बने रहे। पिछले दिनों रेणुका कुमार ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी। सीएम की नाराजगी इसी से समझी जा सकती है कि उन्हें नई पोस्टिंग न देकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है।
पवन ने नियमों को ताक पर रखकर दी थी जमीन
वन विभाग की जमीन केंद्र की अनुमति के बिना किसी को भी नहीं दी जा सकती। लेकिन, वन विभाग के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर जेपी को जमीन दे दी। रेणुका कुमार की रिपोर्ट में नियमों की अवहेलना की पुष्टि हुई। जेपी को जमीन दिए जाने के समय पवन कुमार सचिव वन थे। पवन को अब मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।