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शोध के जरिये इतिहास को सहेजना जरूरी : डॉ. राजेश सिंह
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हिंदी संस्थान के निराला सभागार में विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह की पुस्तक चलते-चलत
लखनऊ। इतिहास को शोध के जरिये सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। यह बात शनिवार को प्रमुख सचिव विधान परिषद डॉ. राजेश सिंह ने अपनी पुस्तक ''''चलते-चलते'''' के विमोचन समारोह में कही। इस मौके पर पुरुषोत्तम सिंह की पुस्तक ''''मथुरा'''' का भी विमोचन मुख्य सचिव एसपी गोयल और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने किया।
डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि उन्होंने कई देशों की यात्रा की है, जहां भौतिक सुविधाएं तो हैं लेकिन सामाजिक आत्मीयता का अभाव महसूस होता है। इसके विपरीत भारतीय संस्कृति में अभिवादन और एक-दूसरे का हालचाल पूछना परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने अपने जीवन में साहित्य और पढ़ने के महत्व को भी साझा किया।
न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने कहा कि किताबें मौन रहकर भी बहुत कुछ कहती हैं। उन्होंने 'मथुरा' पुस्तक की सराहना करते हुए बताया कि इसमें करीब एक हजार वर्ष ईसा पूर्व से वर्तमान तक के इतिहास का उल्लेख है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डॉ. राजेश सिंह के प्रशासनिक सहयोग और योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आत्म प्रकाश मिश्र ने किया। इस मौके पर डॉ. संजय सिंह, प्रो. मांडवी सिंह और प्रदीप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि उन्होंने कई देशों की यात्रा की है, जहां भौतिक सुविधाएं तो हैं लेकिन सामाजिक आत्मीयता का अभाव महसूस होता है। इसके विपरीत भारतीय संस्कृति में अभिवादन और एक-दूसरे का हालचाल पूछना परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने अपने जीवन में साहित्य और पढ़ने के महत्व को भी साझा किया।
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न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने कहा कि किताबें मौन रहकर भी बहुत कुछ कहती हैं। उन्होंने 'मथुरा' पुस्तक की सराहना करते हुए बताया कि इसमें करीब एक हजार वर्ष ईसा पूर्व से वर्तमान तक के इतिहास का उल्लेख है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डॉ. राजेश सिंह के प्रशासनिक सहयोग और योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आत्म प्रकाश मिश्र ने किया। इस मौके पर डॉ. संजय सिंह, प्रो. मांडवी सिंह और प्रदीप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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