मोदी के गुजरात का कारीगर अकेले तराश रहा राम मंदिर के लिए पत्थर
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विवादित ढांचा ढहाए जाने के 24 साल हो गए। राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में राम मंदिर के लिए पत्थरों की तराशी काम शुरू हुए 27 वर्ष हो चुके हैं।
पत्थर तराशी अभी अधूरी है। यह काम पूरा होगा, कोई नहीं बताता। फिलहाल तो गुजरात का सिर्फ एक कारीगर रजनीकांत कार्यशाला में पत्थर तराशी कर रहा है।
विवादित गर्भगृह पर राम मंदिर निर्माण के लिए रामघाट में 30 अगस्त 1990 को भूमि पूजन कर कार्यशाला खोली गई और उसी दिन से पत्थर तराशी का काम शुरू कर दिया गया। तीन कार्यशालाएं राजस्थान में शुरू की गई थीं।
राम मंदिर के लिए कुल एक लाख 75 हजार घनफुट पत्थर तराशे जाने हैं। पत्थर तराशी की रामघाट वाली कार्यशाला के प्रभारी अन्नू भाई सोमपुरा बताते हैं कि राजस्थान की कार्यशालाएं पांच साल पहले बंद कर दी गईं। इस समय रामघाट में एक कारीगर पत्थर तराशी कर रहा है। जनवरी से चार-पांच कारीगर बढ़ाए जाएंगे।
अयोध्या में राम मंदिर के लिए रखे पत्थर
सोमपुरा का कहना है कि अब तक लगभग सवा लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का काम पूरा हो चुका है। इन पत्थरों से प्रस्तावित राम मंदिर का सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप, गर्भगृह तैयार हो जाएगा।
प्रस्तावित राम मंदिर के द्वितीय तल की 85 खंभे बनने हैं। इनमें से लगभग 40 तैयार हैं। शेष खंभों व मंदिर के शिखर आदि के पत्थर को तराशा जाना है।
क्या विश्व हिंदू परिषद व न्यास ने पूरे पत्थर तराश देने की कोई सीमा तय की है, सोमपुरा ने कहा कि नहीं, ऐसी कोई तिथि नहीं है। फिर वे खुद बताने लगते हैं कि अब से अगर नियोजित ढंग से पत्थर तराशी का काम किया जाए तो भी कम से कम चार साल लगेगा।
इस कार्यशाला में पत्थर तराशी के अलावा विराजमान रामलला का प्रथम तल का मंदिर जब बन जाएगा, तो वहां मौके पर भी बहुत सारे काम करने होंगे।
मंदिर निर्माण के आ रहा है खूब चढ़ावा
रामघाट स्थित राम मंदिर की यह कार्यशाला भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का एक केंद्र है।
कार्यशाला के परिसर में राम मंदिर के लिए विभिन्न चरणों में हुए आंदोलन की लगाई गई सचित्र प्रदर्शनी और चंदन की लकड़ी का बना शीशे के शोकेस में रखा प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल श्रद्धालुओं की आस्था से अपने को जोड़ लेता है।
यहां एक बड़ा दानपात्र भी रखा है, जिसमें मंदिर निर्माण के लिए चढ़ावा भी खूब आ रहा है।