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यूपी चुनाव की तैयारी: भाजपा में पहले 14 जिलाध्यक्ष होंगे नियुक्त, फिर संगठन में फेरबदल, ये है पूरा प्लान

Thu, 08 Jan 2026 09:56 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 08 Jan 2026 09:56 AM IST
सार

यूपी में भाजपा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति इस महीने के अंत तक हो सकती है। इसके बाद संगठन में फेरबदल की तैयारी है। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई जिलों में जारी अंदरूनी कलह को संभालना भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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Preparations for UP elections: BJP will first appoint 14 district presidents, then reshuffle the organization,
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश भाजपा संगठन को और मजबूत करने की तैयारियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन के तहत गठित 98 जिलों में से शेष बचे 14 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति है। इसके बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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सूत्रों के अनुसार, पहले इन 14 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पूरी की जाएगी, जिसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव पर मंथन शुरू होगा। इससे पहले नियुक्त किए गए 84 जिलाध्यक्षों को लेकर उठ रहे सवालों और कई जिलों में जारी अंदरूनी कलह को संभालना भी नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और सहमति न बन पाने के कारण 14 जिलों में नियुक्ति लंबित रह गई। इनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है। पंकज चौधरी ने परिचयात्मक दौरों के जरिये कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू किया है। वे लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि आगामी संगठनात्मक फैसलों में कैडर आधारित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह स्पष्ट है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम होगी।

सूत्रों के मुताबिक, जिन 14 जिलों में अभी नियुक्ति नहीं हो पाई है, उनमें अंबेडकरनगर, गोंडा, अयोध्या जिला व महानगर, वाराणसी जिला, चंदौली, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, लखीमपुर, पीलीभीत, शामली, सहारनपुर और अमरोहा शामिल हैं। इन जिलों में क्षेत्रीय विधायकों और दावेदारों के बीच मतभेद के कारण सहमति नहीं बन सकी थी। दरअसल जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय समीकरणों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों ने प्रक्रिया को काफी जटिल बना दिया। कई जिलों में मौजूदा अध्यक्षों की दोबारा या तीसरी बार दावेदारी भी विवाद का कारण बनी। इसी बीच नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होने से अब इन जिलों में संतुलन साधने की जिम्मेदारी सीधे उनके कंधों पर आ गई है।

नए पैनल पर होगा फैसला: सूत्र बताते हैं कि शेष 14 जिलों के लिए संबंधित क्षेत्रीय संगठनों से तीन-तीन नामों के नए पैनल मांगे गए हैं। पुराने पैनल मौजूद होने के बावजूद नए प्रदेश अध्यक्ष ने नए सिरे से नाम भेजने को कहा है। इन पर अंतिम निर्णय के बाद जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद प्रदेश और क्षेत्रीय संगठन में व्यापक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी।

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