Smart meter: यूपी में एक जुलाई से लगेंगे बिजली के 4जी प्री-पेड स्मार्ट मीटर, किस्तों में होगी बकाया बिल की वसूली
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने प्री पेड स्मार्ट मीटर लगाने की मंजूरी दे दी है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं की जमानत राशि के समायोजन की व्यवस्था करनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश में एक जुलाई से बिजली उपभोक्ताओं के यहां 4जी तकनीक के प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी सहमति दे दी है। इसके बाद पावर कॉर्पोरेशन ने अब एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेस लिमिटेड (ईईएसएल) से 4जी तकनीक के स्मार्ट मीटर ही लगवाने का फैसला किया है। यही नहीं पूर्व में लगाए जा चुके 2जी व 3जी तकनीक के करीब 12 लाख मीटरों को भी 4जी तकनीक में बदला जाएगा।
दरअसल 2108 में ईईएसएल द्वारा लगाए जा रहे 2जी व 3जी तकनीक 40 लाख स्मार्ट मीटर में भार जंपिंग समेत अन्य खामियां सामने आने पर राज्य उपभोक्ता परिषद ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। इस पर 12 लाख मीटर लगने के बाद बाकी मीटर लगाने पर रोक लगा दी गई थी। बीते एक साल से ज्यादा समय से स्मार्ट मीटर लगाने की योजना खटाई में पड़ी थी।
पावर कॉर्पोरेशन व बिजली कंपनियां 4जी तकनीक के प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगवाने की तैयारी में तो जुटी हैं, लेकिन इसमें कई पेंच भी आड़े आ रहे हैं। बिजली कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि कनेक्शन जारी करते समय उपभोक्ताओं से जमा कराई गई जमानत राशि का समायोजन कैसे होगा?
दूसरा संकट यह है कि जिन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया है उनके यहां मीटर कैसे लगाए जाएंगे क्योंकि इससे बकाया राशि के फंसने का अंदेशा है। इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए शीर्ष स्तर पर मंथन चल रहा है। जल्द ही रास्ता निकालकर स्मार्ट मीटर लगाने की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।
उपभोक्ताओं को करनी होगी ये व्यवस्था
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने के साथ ही बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं की जमानत राशि के समायोजन की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही जो बकायेदार एक साथ पूरा बकाया जमा करने में सक्षम नहीं हैं उनसे 10 किस्तों में वसूली की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
वर्मा ने कहा कि कुछ अन्य राज्यों में यही प्रक्रिया प्रस्तावित है। वर्मा ने सरकार व पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि चाहे जिस कंपनी के प्री-पेड स्मार्ट प्रीपेड लगवाए जाएं, लेकिन वह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) प्रमाणपत्र का मानक पूरा करने वाला होना चाहिए।