प्रतापगढ़ के डीएम ने लिखी शासन को गोपनीय चिट्ठी, कहा- पुलिस के फर्जी खुलासे से बढ़ रहा अपराध
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प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने जिले में तैनात तीन पुलिस अधिकारियों व छह इंस्पेक्टर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए शासन को गोपनीय पत्र लिखा है। इसके आधार पर अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार, पुलिस उपाधीक्षक अंजनी राय और जिलाजीत चौधरी को जिले से हटा दिया गया है। जबकि उन्होंने पांच थाना प्रभारी व एसआईटी के एक इंस्पेक्टर की भूमिका को संदिग्ध बताया है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों प्रतापगढ़ में लगातार कई आपराधिक घटनाएं हुई थीं। इसके बाद डीएम मार्कंडेय शाही ने गृह विभाग को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी। इसमें कुछ पुलिस अधिकारियों और इंस्पेक्टर को इंगित करते हुए कहा गया है कि समय से एफआईआर दर्ज न किए जाने, घटनाओं का सही खुलासा न होने और दबाव में फर्जी खुलासा किए जाने से अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे आम लोगों में पुलिस की नकारात्मक छवि बन रही है।
उन्होंने एसटीएफ के इंस्पेक्टर हेमंत भूषण सिंह के बारे में लिखा, इनकी शिक्षा-दीक्षा प्रतापगढ़ जिले में ही हुई है। बड़े-बड़े गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न कराने में इनके प्रभाव व संरक्षण की जानकारी मिली है।
इतना ही नहीं, डीएम की रिपोर्ट में प्रभारी निरीक्षक शहर कोतवाली रवींद्र, प्रभारी निरीक्षक अंतू संजय, प्रभारी निरीक्षक सांगीपुर रतनलाल, प्रभारी निरीक्षक उदयपुर गजानंद चौबे व प्रभारी निरीक्षक हथिगवां दीपक कुमार के बारे में प्रतिकूल टिप्पणी की है। इनमें से रवींद्र को अभी तक थाने से हटाया गया है। बाकी चार इंस्पेक्टर अभी भी अपने पदों पर कायम हैं। जबकि सीओ और एएसपी स्तर के अधिकारियों को हटाया जा चुका है।
रिपोर्ट पर ये लिए गए थे फैसले
डीएम ने यह रिपोर्ट 30 जून को शासन को भेजी थी। रिपोर्ट मिलने के तत्काल बाद 4 जुलाई को अवनीश मिश्रा को प्रतापगढ़ से अंबेडकर नगर भेज दिया गया। जिलाधिकारी ने यह रिपोर्ट 30 जून को शासन को भेजी थी। इस रिपोर्ट के तत्काल बाद 4 जुलाई को एएसपी अवनीश मिश्रा को प्रतापगढ़ से अंबेडकरनगर भेज दिया गया।
इसके बाद 3 अगस्त को डीएसपी अंजनी राय को पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय मुरादाबाद और जिलाजीत को डीएसपी सचिवालय सुरक्षा में तैनात कर दिया गया है। इनके स्थान पर सचिवालय सुरक्षा में तैनात प्रदीप कुमार वर्मा को और कानपुर नगर में तैनात दीप चंद्र को प्रतापगढ़ भेजा गया है।
मुआवजे के लिए सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन आम प्रवृत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतापगढ़ में किसी आपराधिक घटना के बाद 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, पीड़ित परिवार के सदस्य के नाम शस्त्र लाइसेंस, आश्रित को सरकारी सेवा, आवास व भूमि आवंटन की मांग को लेकर सड़क पर शव रखकर 24 से 48 घंटे तक प्रदर्शन किया जाता है।
यह आम प्रवृति है। अपराध को अपराध मानते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय ये मांग प्रस्तुत कराकर ध्यान भटका दिया जाता है। ऐसे प्रदर्शनों से सरकार की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ता है।