{"_id":"68496f01e815df7cde04cba4","slug":"prakatya-utsav-of-lord-jagannath-celebrate-in-sri-madhav-mandir-lucknow-news-c-13-1-lko1020-1244687-2025-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: प्राकट्य उत्सव में भगवान श्री जगन्नाथ संग भाई बलराम व बहन सुभद्रा को 108 मिट्टी के पात्र में सुगंधित जल से कराया स्नान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: प्राकट्य उत्सव में भगवान श्री जगन्नाथ संग भाई बलराम व बहन सुभद्रा को 108 मिट्टी के पात्र में सुगंधित जल से कराया स्नान
विज्ञापन
श्री माधव मंदिर में मनाया गया भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य उत्सव। स्वयं
डालीगंज स्थित श्री माधव मंदिर में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बुधवार को भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। हर वर्ष की तहर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानी 27 जून को निकलेगी। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर से निकलकर नगर भ्रमण करते हैं।
श्री माधव मंदिर में बुधवार को विधि-विधान से पंडित लालता प्रसाद ने मंत्रोचार के बीच भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम, बहन सुभद्रा को स्नान कराया। इस स्नान यात्रा को स्नान पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। इस दौरान मौजूद रहे बिहारी लाल साहू, कंचन, भारत भूषण गुप्ता, अनुराधा गोयल, अनुराग साहू, रवीना ने बताया कि यह रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि स्नान यात्रा में सुगंधित पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को कुल 108 पात्र के पानी से स्नान कराया गया।
परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को स्नान कराने के लिए 35 मिट्टी के पात्र, बलभद्र को 33 मिट्टी के पात्र, देवी सुभद्रा को 22 मिट्टी के पात्र और भगवान सुदर्शन को 18 मिट्टी के पात्र में भरे पानी से नहलाया जाता है। माना जाता है कि इस पवित्र स्नान के बाद, भाई-बहन के देवताओं को बुखार हो जाता है और उन्हें दो सप्ताह की अवधि के लिए एकांतवास में रखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्री माधव मंदिर में बुधवार को विधि-विधान से पंडित लालता प्रसाद ने मंत्रोचार के बीच भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम, बहन सुभद्रा को स्नान कराया। इस स्नान यात्रा को स्नान पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। इस दौरान मौजूद रहे बिहारी लाल साहू, कंचन, भारत भूषण गुप्ता, अनुराधा गोयल, अनुराग साहू, रवीना ने बताया कि यह रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि स्नान यात्रा में सुगंधित पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को कुल 108 पात्र के पानी से स्नान कराया गया।
परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को स्नान कराने के लिए 35 मिट्टी के पात्र, बलभद्र को 33 मिट्टी के पात्र, देवी सुभद्रा को 22 मिट्टी के पात्र और भगवान सुदर्शन को 18 मिट्टी के पात्र में भरे पानी से नहलाया जाता है। माना जाता है कि इस पवित्र स्नान के बाद, भाई-बहन के देवताओं को बुखार हो जाता है और उन्हें दो सप्ताह की अवधि के लिए एकांतवास में रखा जाता है।
विज्ञापन