फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   power crisis increase in uttar pradesh

सपा अधिवेशन ने बढ़ाया बिजली का दबाव

Thu, 09 Oct 2014 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 09 Oct 2014 12:50 PM IST
विज्ञापन
power crisis increase in uttar pradesh

कोयले की कमी के कारण केंद्रीय बिजलीघरों की कई इकाइयां बंद हो जाने से प्रदेश में एक बार फिर बिजली संकट गहरा गया है। बिजली की कमी के चलते गांवों से लेकर शहरों तक अतिरिक्त आपात कटौती हो रही है।

विज्ञापन


दुर्गापूजा व दशहरे का दबाव कम होने के बाद अब शाम को शहरी क्षेत्रों में आपात कटौती करके लोड मैनेजमेंट किया जा रहा है।

राजस्व के नुकसान को देखते हुए यथासंभव उद्योगों को कटौती मुक्त रखने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन जरूरत पर थोड़ी-बहुत कटौती का विकल्प खुला रखा गया है।

प्रदेश के तो दूर केंद्र अपने ही बिजलीघरों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध नहीं करा पा रहा है जिससे यूपी समेत उत्तरी ग्रिड से जुड़े सभी राज्यों को कोटे से कम बिजली मिल पा रही है।
विज्ञापन



केंद्र के रुख को देखते हुए कॉर्पोरेशन अपने स्तर से अतिरिक्त बिजली के इंतजाम में जुटा है। 10 अक्तूबर को 1000 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए टेंडर खोले जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


सपा अधिवेशन से बढ़ा बिजली का दबाव

power crisis increase in uttar pradesh

राजधानी में बुधवार से शुरू हुए सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन ने पावर कॉर्पोरेशन व लेसा के सामने बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और लेसा के आला अधिकारी अधिवेशन के दौरान राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखने के लिए पूरा दम लगाए हुए हैं।

इनकी पूरी कोशिश है कि अधिवेशन ठीक-ठाक निपट जाए और बिजली को लेकर किसी तरह का बखेड़ा न खड़ा हो। लेसा ने अधिवेशन स्थल पर आपूर्ति के वैकल्पिक इंतजाम भी किए हैं ताकि अगर कोई फीडर बंद हो तो तत्काल दूसरे फीडर से आपूर्ति शुरू हो जाए।

अधिवेशन स्थल पर अनवरत आपूर्ति के लिए अधिशासी अभियंताओं से लेकर अवर अभियंताओं तक की टीम लगाई गई है। पावर कॉर्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि अधिवेशन को लेकर काफी दबाव है।

बुधवार रात चार इकाइयां रही बंद

power crisis increase in uttar pradesh

प्रदेश में बिजली की मांग 13,000 मेगावाट के आसपास है। मंगलवार तक तो उपलब्धता 10,500 मेगावाट के आसपास थी।

वहीं बीती रात कोयले की कमी और तकनीकी कारणों से सिंगरौली, दादरी, व टांडा की कुल मिलाकर चार इकाइयां बंद हो जाने से यूपी के कोटे में 350 मेगावाट तक की कमी हो गई है।

राज्य के सभी बिजलीघरों में 5000-5200 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि केंद्र से 4000 मेगावाट बिजली मिल रही है।

1000 मेगावाट बिजली एनर्जी एक्सचेंज से खरीदी जा रही है। गांवों को औसतन पांच-छह घंटे तथा शहरों को 12 से 18 घंटे बिजली मिल पा रही है। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी. मिश्र ने बुधवार को छुट्टी के बावजूद भी काम किया।

उन्होंने नियंत्रण कक्ष और विशेष विद्युत क्रय अनुबंध इकाई के अधिकारियों के साथ बैठक कर अतिरिक्त बिजली के इंतजाम के लिए जरूरी निर्देश दिए।

अगले 24 घंटे में मिल सकती है राहत

power crisis increase in uttar pradesh

मिश्र का कहना है कि बृहस्पतिवार के लिए एनर्जी एक्सचेंज से लगभग 11 करोड़ रुपये की 20 मिलियन यूनिट बिजली मिल गई है इसलिए अगले 24 घंटे में बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।

बिजली की कमी के मद्देनजर 1000 मेगावाट बिजली खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। इसके टेंडर 10 अक्तूबर को खोले जाएंगे।
कोशिश है कि उसी दिन टेंडरों का मूल्यांकन करके कम दर पर बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी या राज्य से बिजली खरीदने का आदेश जारी कर दिया जाए।

आंध्र प्रदेश का विभाजन करके बनाए गए तेलंगाना राज्य ने बिजली संकट से जूझ रहे यूपी जैसे राज्यों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

विभाजन के बाद ज्यादातर बिजली परियोजनाएं आंध्र प्रदेश के हिस्से में आई हैं जबकि तेलंगाना में कृषि लोड ज्यादा है।

पावर कॉर्पोरेशन को उपभोक्ताओं की फिक्र नहीं

power crisis increase in uttar pradesh

प्रदेश के विद्युत नियामक आयोग को उपभोक्ताओं की नहीं, पावर कॉर्पोरेशन की फिक्र है। यही वजह है कि तीन साल से वह उपभोक्ताओं पर लगातार भार डालता जा रहा है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने ऐसे कई पहलू गिनाते हुए उसके खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया है।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2000 से 2012 के बीच घाटे को ट्रू-अप करने के नाम पर उपभोक्ताओं पर रेग्युलेट्री सरचार्ज लगाया गया।

इन 12 वर्षों में उपभोक्ताओं के हालात, उन्हें कितनी बिजली और कैसी सेवाएं दी जा रही है, को आयोग ने समझने का प्रयास नहीं किया।

वर्मा ने आरोप लगाया कि विद्युत अधिनियम 2003 के तहत आयोग को उपभोक्ताओं के हितों के लिए बनाया गया था, लेकिन वह एकतरफा फैसला लेकर आयोग की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है।

गिर रहा है बिजली उत्पादन

power crisis increase in uttar pradesh

प्रदेश के बिजलीघरों से प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) लगातार गिरता जा रहा है। वर्ष 2009-10 में अनपरा बिजलीघर से 81 फीसदी बिजली का उत्पादन होता था, जो वर्ष 2013-14 में घटकर महज 57 फीसदी रह गया है।

यही हाल ओबरा-ए, ओबरा-बी व पनकी बिजलीघरों का भी है। हालात काफी दयनीय हो चुके हैं और उपभोक्ता इनमें पिस रहा है। इस संबंध में परिषद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अनुसार 2013-14 में टैरिफ फिक्सिंग की गई, इसका सीएजी ने भी खुलासा किया। इसके बाद आयोग ने महज एक जांच कमेटी बनाकर औपचारिकता निभाई। इसकी रिपोर्ट आज तक जारी नहीं की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed