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ऊर्जा क्षेत्र के सुधार में विफल पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन, सरकार को किया जा रहा गुमराह

Wed, 07 Oct 2020 08:35 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 07 Oct 2020 08:35 PM IST
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Power corporation management failed to improve energy sector, misleading government
Electricity - फोटो : पेक्सेल्स
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने में विफल हो चुका है। वह अपनी खामियों को छिपाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम से निजीकरण की शुरुआत करने की साजिश कर रहा है। इसके लिए राजस्व लक्ष्य और उसके सापेक्ष होने वाली वसूली के आंकड़े से सरकार को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। मगर, बिजली कर्मी इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे। ये आरोप विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने लगाए हैं। 
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दुबे के मुताबिक कॉर्पोरेशन की ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर ऐसा हो तो सुधार के लिए सभी कार्मिक मिलकर काम करने को तैयार हैं। प्रबंधन ने वार्षिक राजस्व लक्ष्य 50 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया है। मगर कोरोना के चलते तीन माह रहे लॉकडाउन के कारण इस लक्ष्य को पूरा कर पाना संभव नहीं है। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों व बाजार में बिजली का खपत बहुत कम हुआ। यानी जब बिजली नहीं जली तो न्यूनतम उपभोग का फिक्स रेट ही हासिल होगा। इससे राजस्व वसूली का ग्राफ नीचे गिरना स्वाभाविक है। ऐसे में अनलॉक के दौरान राजस्व लक्ष्य नए सिरे से निर्धारित करना चाहिए था, लेकिन नहीं किया गया। प्रबंधन का अभियंताओं पर पूर्व लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व वसूली के लिए दबाव बनाना कतई उचित नहीं है। अगस्त में 4,000 करोड़ और सितंबर में 4,200 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई है। 
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जबरिया दिए कनेक्शन तो कैसे आए राजस्व
दुबे ने बताया कि सौभाग्य योजना के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रामीणों को जबरिया बिजली कनेक्शन दिए गए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने 80 लाख ग्रामीण को बिजली कनेक्शन बांटे। इनके पास बिजली बिल जमा करने के पैसे तक नहीं है तो कैसे राजस्व की वसूली की जाए। 
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पटियाला मॉडल लागू करें तो रुके बिजली चोरी
प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए पटियाला मॉडल लागू करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ। दुबे के मुताबिक इसी मॉडल पर उत्तराखंड ने बिजली चोरी रोकने का अभियान शुरू किया तो उसकी लाइन हानियां घटकर 8 फीसदी तक पहुंच चुकी है। पटियाला मॉडल में बिजली मीटर को पोल पर लगाए जाते हैं। 

आए दिन उलझे रहते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में
दुबे का कहना है कि फील्ड के अभियंता हफ्ते में कई दिन सुबह से शाम तक पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन से लेकर निदेशक तक की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उलझे रहते हैं। इससे अभियंता के रूटीन काम के साथ ही उपभोक्ता सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग में सिर्फ मुख्य अभियंता स्तर तक के ही अभियंता शामिल हो।              


इनका कहना
उधर, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन अरविंद कुमार का कहना है कि संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे जो भी बयान दे रहे हैं, उस पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
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