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बाउल गायन और बांग्ला जायकों संग चहका पौष मेला, महिलाओं ने मेले में की खूब खरीदारी
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बांग्ला भाषा शिक्षा एवं संस्कृति प्रसार समिति की ओर से रविवार को बाल संग्रहालय में लगे पौष मेले म
लखनऊ। चमचम, गुड़ संदेश और लेंग्चा के पारंपरिक स्वाद के साथ बांग्ला गीतों के बीच बांग्लाभाषियों ने रविवार को पौष फागुन मेले को यादगार बनाया। मेले का आकर्षण बंगाल से आए बाउल गायन कलाकार रहे। बांग्ला भाषा शिक्षा एवं संस्कृति प्रसार समिति की ओर से बाल संग्रहालय चारबाग में आयोजित मेले में कई प्रतियोगिताएं भी हुई, जिसमें समाज के लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया।
हर साल जनवरी के दूसरे रविवार को होने वाले पौष मेले का आयोजन इस वर्ष फरवरी की खिली धूप में हुआ तो नगर के बांग्ल भाषी उमड़ पड़े। यूपी मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. देव कुमार डे, रामकृष्ण मठ के स्वामी मुक्तिनाथानंद, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शुभाशीष मुंशी अतिथियों में रहे। समिति के सचिव केके घोष, महामंत्री केके घोषाल, कोषाध्यक्ष सोनाली राय, कमल, टीटी सुनील की मौजूदगी में मेले की शुरुआत बोस, टैगोर के चित्रों पर पुष्पांजलि से हुई। सोनाली राय ने वंदना ‘सौका तोरे आई कांदी हे साकुले’ सुनाई। बंगाल से आए वरिष्ठ बाउल गायक षष्टीदास ने दल के कलाकारों के साथ दोतारा संग बाउल गायन से मुग्ध किया। प्रापो विश्वास, भारती सरकार, खमक पर बापुन, एकतारा पर निखिल विश्वास ने कान्ना हासिर दोल दोलानो पोष फागुन मेला..., अमी एक दिन न देखिलम तारे..., भवे मानुष गुरु निष्ठा जात सर्व साधन सिद्धि हाउता... सहित कई बांग्ला लोक गीतों से मुग्ध किया।
गान के साथ हुई प्रतियोगिताएं, चखे जायके
मेले में बांग्ला गान के साथ लोगों ने परंपरागत बांग्ला जायके भी चखे। मेले में रंगोली, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, बांग्ला लेखन व कविता पाठ, म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता हुई। खानपान के स्टॉल लगे। खजूर गुड़, मिठाई पाटीसाप्टा, कुलीपीठा, संदेश, गुड़ संदेश, खजूर गुड़, रसगुल्ला, खीर कदम, गुड़ खीर कदम का लुत्फ लिया।
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हर साल जनवरी के दूसरे रविवार को होने वाले पौष मेले का आयोजन इस वर्ष फरवरी की खिली धूप में हुआ तो नगर के बांग्ल भाषी उमड़ पड़े। यूपी मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. देव कुमार डे, रामकृष्ण मठ के स्वामी मुक्तिनाथानंद, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शुभाशीष मुंशी अतिथियों में रहे। समिति के सचिव केके घोष, महामंत्री केके घोषाल, कोषाध्यक्ष सोनाली राय, कमल, टीटी सुनील की मौजूदगी में मेले की शुरुआत बोस, टैगोर के चित्रों पर पुष्पांजलि से हुई। सोनाली राय ने वंदना ‘सौका तोरे आई कांदी हे साकुले’ सुनाई। बंगाल से आए वरिष्ठ बाउल गायक षष्टीदास ने दल के कलाकारों के साथ दोतारा संग बाउल गायन से मुग्ध किया। प्रापो विश्वास, भारती सरकार, खमक पर बापुन, एकतारा पर निखिल विश्वास ने कान्ना हासिर दोल दोलानो पोष फागुन मेला..., अमी एक दिन न देखिलम तारे..., भवे मानुष गुरु निष्ठा जात सर्व साधन सिद्धि हाउता... सहित कई बांग्ला लोक गीतों से मुग्ध किया।
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गान के साथ हुई प्रतियोगिताएं, चखे जायके
मेले में बांग्ला गान के साथ लोगों ने परंपरागत बांग्ला जायके भी चखे। मेले में रंगोली, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, बांग्ला लेखन व कविता पाठ, म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता हुई। खानपान के स्टॉल लगे। खजूर गुड़, मिठाई पाटीसाप्टा, कुलीपीठा, संदेश, गुड़ संदेश, खजूर गुड़, रसगुल्ला, खीर कदम, गुड़ खीर कदम का लुत्फ लिया।

बांग्ला भाषा शिक्षा एवं संस्कृति प्रसार समिति की ओर से रविवार को बाल संग्रहालय में लगे पौष मेले म
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