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इसे कहते हैं नहले पर दहला
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 03 Jan 2014 02:50 PM IST
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कुर्सी कौन नहीं चाहता है। इसके लिए चापलूसी करने से भी लोग पीछे नहीं रहते।
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पिछले दिनों चौधरी साहब की जयंती पर सपा प्रदेश मुख्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नेताजी के साथ गीतकार नीरजजी भी थे।
ऐसे में सुनने-सुनाने का दौर भी चला। नेताजी ने नीरज से कहा, कुछ सुनाएं। वे तो हल्का-फुल्का सुनाकर चुप हो गए, लेकिन सुनाने वालों की झड़ी लग गई।
एक साहब हैं जिन्हें उनके विचार से बिल्कुल विपरीत मद्य निषेध का काम दिया गया है, वह भी सुनाने के लिए आगे आए। उनकी अपनी मौलिक रचना तो थी नहीं, सो मोबाइल पर किसी से मैसेज मंगाकर सुनाना शुरू किया।
वह चुप हुए ही थे कि एक अदना-सा कार्यकर्ता उठा और नेताजी की शान में कसीदे पढ़ने लगा।
उसने जो सुनाया उस पर उसे नेताजी की भी खूब वाहवाही मिली। वहां मौजूद लोगों ने कहा कि इसे कहते हैं नहले पर दहला।