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अफसरों की सुस्ती से टूटी गरीबों को मकान मिलने की उम्मीद, ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड व पीओ होंगे दंडित
Thu, 25 Jul 2019 12:07 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 25 Jul 2019 12:07 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
केंद्र की मदद से बनाई गईं आवासीय कॉलोनियों के नगर निकायों को हस्तांतरित नहीं होने से गरीबों को मकान मिलने की उम्मीद टूट रही है। 31 मार्च तक निर्धारित तय समय सीमा बीतने के बाद अधूरी पड़ी योजनाओं के पीछे अफसरों की हीलाहवाली बताई जा रही है।
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केंद्र की भागीदारी से ‘इन्टीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम विकास कार्यक्रम’ आईएचएसडीपी और ‘बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पूअर्स’ बीएसयूपी आवासीय योजनाओं की शुरुआत 2009 में प्रदेश के 85 शहरों में की गई थी। इनमें 16 नगर निगमों के अलावा नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतें भी शामिल हैं।
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योजना के तहत शहर की मलिन बस्तियों के गरीबों के लिए आवास बनाने का काम सूडा को करना था, जबकि कालोनियों में सीवरेज, सड़क, मार्ग प्रकाश, बिजली व्यवस्था व पेय जलापूर्ति से संबंधित कार्य नगर निकायों को करने थे। इसके लिए कॉलोनियों का हस्तांतरण होना था।
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गाइडलाइन के मुताबिक, कॉलोनियों में आवासों का निर्माण पूरा कर 31 मार्च तक हस्तांतरण होना था, लेकिन अब हस्तांतरण नहीं हो सका है। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) की निगरानी में दोनों योजनाओं के तहत 225 प्रोजेक्ट चल रहे थे, जिसमें से अभी तक सिर्फ 54 ही पूरे हो पाए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं होने से सभी प्रोजेक्टों की लागत बढ़ गई है।
केंद्रीय अधिकारियों ने जताई नाराजगी
पिछले दिनों दिल्ली में हुई बैठक में प्रोजेक्ट की देरी पर केंद्रीय अधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए दिसंबर तक कॉलोनियों के हैंडओवर करने का मौका दिया गया है। इसके बाद भी काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट कर संबंधित परियोजना अधिकारी (पीओ) को दंडित किया जाएगा।