मोदी के 'क्षेत्र' में नसबंदी के बाद जानवर जैसा बर्ताव
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आधी आबादी के हित और अधिकार पर शासन स्तर पर भले ही गंभीर हो लेकिन स्थानीय स्तर पर महिलाओं के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
ऐसा ही नजारा गुरुवार को चिरईगांव स्थित पीएचसी परिसर में आयोजित नसबंदी शिविर में देखा गया। इस मौके पर पंजीकृत 76 में से 73 महिलाओं का आपरेशन एक ही चिकित्सक ने महज चार घंटे में कर दिया।
जबकि मानक के तहत एक चिकित्सक को 30 आपरेशन ही करना चाहिए। आपरेशन के बाद ठंड में महिलाओं को फर्श पर बिछी दरी व चादर पर लिटा दिया गया।
रात में हुई बारिश और बदली के चलते जमीन पर सीलन और नमी है। ठंड में भी इजाफा हुआ है। इसकी परवाह किए बगैर पीएचसी प्रशासन ने नसबंदी कराने वाली 73 महिलाओं को आपरेशन के बाद फर्श पर लिटा दिया।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ये लापरवाही की खबर जब ऊपर तक पहुंची तो मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि दोषी डॉक्टरों को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, मामले पर प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने डीजीपी हेल्थ को जांच के आदेश दिए हैं।
बेखबर रहे अधिकारी
गुरुवार दोपहर जांच के लिए पीएचसी पहुंचे उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरआर राय ने भी इसपर ध्यान नहीं दिया।
हालांकि पीएचसी के कार्यवाहक चिकित्सा प्रभारी डा. राजनाथ का कहना है कि डा. सुनील कुमार के अवकाश पर होने के कारण उनको दो दिन का चार्ज मिल है। पहले की तरह ही नसबंदी शिविर का आयोजन आज भी हुआ है।
गौरतलब है कि ब्लाक क्षेत्र के नरपतपुर में 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। वहां आपरेशन थिएटर समेत सुविधाएं हैं लेकिन हर सप्ताह नसबंदी शिविर चिरईगांव पीएचसी पर लगता है।