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लखनऊ यूनिवर्सिटीः बदलेंगे पुअर बॉयज फंड के नियम-कायदे
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Sat, 08 Jul 2017 03:24 PM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पूअर बॉयज फंड से मदद लेने के लिए विद्यार्थियों को अब पहले जितनी मशक्कत नहीं करनी होगी। विवि प्रशासन शैक्षणिक सत्र 2017-18 से निर्धन छात्रों को इस फंड से सहायता देने के लिए नियमों में छूट देने जा रहा है।
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सख्त नियमों की वजह से अभी तक सहायता के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर छात्रों को मदद नहीं मिल पाती थी। अगले सप्ताह होने वाली बैठक में नई नियमावली पर मुहर लग जाएगी।
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एलयू में गरीब छात्रों की मदद के लिए पुअर बॉयज फंड स्थापित है। इसके नाम पर विवि में प्रवेश लेने वाले सभी स्टूडेंट्स से सालाना 200 रुपये फीस ली जाती है, लेकिन प्रचार-प्रसार न होने और कड़ी शर्तों के कारण ज्यादातर स्टूडेंट्स इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
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शर्तों के अनुसार सहायता के लिए स्टूडेंट्स को पूर्ववर्ती कक्षा में 60 फीसदी अंक व अधिकतम पारिवारिक आय एक लाख रुपये सालाना तय की गई है। निर्धन छात्र सहायता कोष से स्टूडेंट्स को मदद देने के लिए ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना का नाम दिया है।
योजना के अनुसार सहायता पाने के लिए स्टूडेंट्स को विश्वविद्यालय में काम करना होगा। सहायता के लिए स्टूडेंट्स को हॉस्टल्स में रिकॉर्ड कीपिंग, विभागों व हॉस्टल में कंप्यूटर से जुड़े काम, लाइब्रेरी में सहायता, आदि कामों में जोड़ने का प्रस्ताव भी था।
50 लाख की वसूली, 2.5 लाख की मदद
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लविवि हर साल प्रति स्टूडेंट दौ सौ रुपये निर्बल छात्र सहायता कोष के लिए लेता है। जीरो फीस वाले स्टूडेंट्स को छोड़ने के बाद यह राशि हर साल करीब 25 लाख रुपये बनती है। पिछले दो साल में ही इसके नाम पर विवि को करीब 50 लाख रुपये फीस मिली है।
इसके बावजूद लाभार्थियों की संख्या करीब 50 ही रही है। विवि अधिकतम पांच हजार रुपया आर्थिक सहायता देता है। इस तरह से विवि ने फंड से स्टूडेंट्स को करीब ढाई लाख रुपये की मदद दी है।
पिछले दस साल की बात करें तो यह रकम करोड़ों में है, लेकिन लाभार्थियों की संख्या इक्का-दुक्का ही है। लविवि प्रशासन छात्रसंघ चुनाव के नाम पर ली गई फीस के डेढ़ करोड़ रुपये दबाकर बैठा है। यह 11वां साल है जबकि लविवि में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं।
इसके बावजूद हर साल छात्रसंघ के नाम पर प्रति स्टूडेंट 75 रुपये फीस वसूली जा रही है। पिछले 11 साल से लगातार हो रही वसूली की वजह से यह राशि डेढ़ करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुकी है।
यह शैक्षिक सत्र समाप्ति की ओर है। स्टूडेंट्स से ली गई फीस का कोई लेखा-जोखा नहीं है। इसके बाद जुलाई में नए शैक्षिक सत्र में भी छात्रसंघ चुनाव के नाम पर वसूली होगी, लेकिन चुनाव होेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है।
इसके बावजूद लाभार्थियों की संख्या करीब 50 ही रही है। विवि अधिकतम पांच हजार रुपया आर्थिक सहायता देता है। इस तरह से विवि ने फंड से स्टूडेंट्स को करीब ढाई लाख रुपये की मदद दी है।
पिछले दस साल की बात करें तो यह रकम करोड़ों में है, लेकिन लाभार्थियों की संख्या इक्का-दुक्का ही है। लविवि प्रशासन छात्रसंघ चुनाव के नाम पर ली गई फीस के डेढ़ करोड़ रुपये दबाकर बैठा है। यह 11वां साल है जबकि लविवि में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं।
इसके बावजूद हर साल छात्रसंघ के नाम पर प्रति स्टूडेंट 75 रुपये फीस वसूली जा रही है। पिछले 11 साल से लगातार हो रही वसूली की वजह से यह राशि डेढ़ करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुकी है।
यह शैक्षिक सत्र समाप्ति की ओर है। स्टूडेंट्स से ली गई फीस का कोई लेखा-जोखा नहीं है। इसके बाद जुलाई में नए शैक्षिक सत्र में भी छात्रसंघ चुनाव के नाम पर वसूली होगी, लेकिन चुनाव होेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है।
देखें, अर्हता की शर्तें
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वर्तमान मेंं ये हैं अर्हता की शर्तें
- वार्षिक पारिवारिक आय सालाना दो लाख या इससे कम। यह सीमा सरकारी नियमों के अनुसार बदल सकती है।
- आवेदक पूर्व की किसी सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा में न तो फेल हो और न ही उसका बैक पेपर रहा हो।
- पहले से किसी अन्य जगह से छात्रवृत्ति या आर्थिक सहायता न मिल रही हो।
-सहायता स्टूडेंट्स की वास्तविक फीस या अधिकतम पांच हजार रुपये तक ही दी जाएगी।
- आवेदक विवि परिसर में चलने वाले किसी रेग्युलर या सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पंजीकृत हो।
- अपनी पिछली परीक्षा में न्यूनतम 60 फीसदी अंक और न्यूनतम 75 फीसदी कक्षाओं में उपस्थिति हो।
- किसी अवैधानिक प्रक्रिया में संलिप्त न हो, कोई जांच न चल रही हो, पूर्व में अपनी गतिविधियों के चलते निलंबन या निष्कासन अथवा अन्य किसी प्रकार की सजा न मिली हो।
- यदि छात्र-छात्रा द्वारा इस सहायता को लेने के लिए दी गई जानकारी गलत मिलती है तो उसे सहायता मिलने के बाद भी धनराशि लौटानी होगी।
‘पुअर बॉयज फंड से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को सहायता मिले इसके लिए हम नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। कुलपति की अध्यक्षता में अगले सप्ताह बैठक में हम इस पर विचार करेंगे।’ - प्रो. राजकुमार सिंह अधिष्ठाता छात्र कल्याण, लविवि
- वार्षिक पारिवारिक आय सालाना दो लाख या इससे कम। यह सीमा सरकारी नियमों के अनुसार बदल सकती है।
- आवेदक पूर्व की किसी सेमेस्टर या वार्षिक परीक्षा में न तो फेल हो और न ही उसका बैक पेपर रहा हो।
- पहले से किसी अन्य जगह से छात्रवृत्ति या आर्थिक सहायता न मिल रही हो।
-सहायता स्टूडेंट्स की वास्तविक फीस या अधिकतम पांच हजार रुपये तक ही दी जाएगी।
- आवेदक विवि परिसर में चलने वाले किसी रेग्युलर या सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पंजीकृत हो।
- अपनी पिछली परीक्षा में न्यूनतम 60 फीसदी अंक और न्यूनतम 75 फीसदी कक्षाओं में उपस्थिति हो।
- किसी अवैधानिक प्रक्रिया में संलिप्त न हो, कोई जांच न चल रही हो, पूर्व में अपनी गतिविधियों के चलते निलंबन या निष्कासन अथवा अन्य किसी प्रकार की सजा न मिली हो।
- यदि छात्र-छात्रा द्वारा इस सहायता को लेने के लिए दी गई जानकारी गलत मिलती है तो उसे सहायता मिलने के बाद भी धनराशि लौटानी होगी।
‘पुअर बॉयज फंड से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को सहायता मिले इसके लिए हम नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। कुलपति की अध्यक्षता में अगले सप्ताह बैठक में हम इस पर विचार करेंगे।’ - प्रो. राजकुमार सिंह अधिष्ठाता छात्र कल्याण, लविवि