फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Pollution increased winter in Lucknow

राजधानी में प्रदूषण ने बढ़ा दी ठंड, दिखना भी हो गया कम

Mon, 08 Nov 2021 01:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 01:42 AM IST
विज्ञापन
Pollution increased winter in Lucknow
राजधानी में स्मॉग और गिरते पारे का असर इस सीजन में पहली बार वीकेंड पर दिखा। लोगों ने कंबल-जैकेट-स्वेटर तक निकाल लिए और रविवार को कई दोपहिया वाहन सवार जैकेट में नजर आए।
विज्ञापन

मौसम विज्ञानी और भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि दीपावली पर दागे गए पटाखों के धुएं से बनी चादर ने सूरज की किरणों को धरती तक आने में रोक दिया।
इसके चलते पारा गिरा और वायु प्रदूषण भी बढ़ गया। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होेने से पछुआ हवाएं जल्द चलेंगी। इससे प्रदूषण का स्तर तो कम होगा, पर सर्दी बढ़ेगी।
विज्ञापन

मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री दर्ज हुआ। इसमें सामान्य से 4.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, न्यूनतम तापमान 14.8 डिग्री रहा, हालांकि ये सामान्य से .3 डिग्री अधिक रहा। रविवार सुबह आठ बजे के करीब दृश्यता 800 मीटर रही और दोपहर 12 बजे से शाम 6.30 बजे तक दृश्यता 1.2 किमी. दर्ज की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक, जेपी गुप्ता के मुताबिक, प्रदूषण का असर मौसम पर दिख रहा है। यही वजह है कि धुंध के साथ प्रदूषक कण बने हुए हैं।
वहीं, यूपीपीसीबी ने भी अलर्ट किया है कि आने वाले दो-तीन दिन तक स्मॉग से वायु प्रदूषण बढ़ा रह सकता है।
दिन की कम होती अवधि के साथ बढ़ेगी ठंड
लखनऊ विश्वविद्यालय में भू-विज्ञान के प्रो. ध्रुवसेन सिंह कहते हैं कि दिन के छोटे होने का मतलब है कि सूर्य के प्रभाव का वक्त कम हो रहा है। वहीं, पटाखों के धुएं से छाई चादर ने सूर्य की किरणों को रोक दिया है। इससे ठंड बढ़ गई है। वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएम नौटियाल कहते हैं कि सर्दी में भूतल का तापमान कम होता है। हवा ठंडी होने के कारण प्रदूषण को ऊपर नहीं ले जा पाती है, यही वजह है कि प्रदूषण का पिंजरा धरती के आसपास निर्मित होता है।
तीन दिन तक पारे की चाल के आसार
नवंबर अधिकतम न्यूनतम
08 27.0 14.0
09 27.0 14.0
10 28.2 14.0
बीते दिनों में यूं गिरा-चढ़ा पारा
नवंबर अधिकतम न्यूनतम
07 26.2 14.8
06 28.3 14.8
05 29.7 16.7
04 29.6 16.2
उद्योग बंद तब भी बढ़ा हुआ प्रदूषण
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. रामकरन का कहना है कि हवा थमने के चलते धुएं के कणों के पूरी तरह नहीं छंट पाने से वायु प्रदूषण बढ़ा हुआ है। वायु प्रदूषण को कम करने जरूरी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जहां सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं, नगर निगम की मदद से स्मॉग गन का उपयोग कर हवा और पेड़ों पर जमी धूल व धुएं के कणों को हटाया जा रहा है। सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति औद्योगिक इलाकों की है। तालकटोरा आदि में फैक्टिरयां दीपावली के चलते बंद थीं। फिर भी यहां प्रदूषण बढ़ा हुआ है। सर्वे कर इसकी वजह तलाशी जा रही है।
ऐसे बदली शहर की हवा
नवंबर एक्यूआई
पांच 278, खराब
छह 260, खराब
सात 299, खराब
कहां कितना एक्यूआई
इलाका एक्यूआई
तालकटोरा 382, बहुत खराब
अलीगंज 228, खराब
लालबाग 274, खराब
गोमतीनगर 293, खराब
बीबीएयू 311, बहुत खराब
कुकरैल 329, बहुत खराब
चारबाग में दागे गए सबसे अधिक पटाखे
आईआईटीआर ने दीपावली के मौके पर दो, तीन, चार, पांच और छह नवंबर को अलीगंज, विकासनगर, गोमतीनगर, अमीनाबाद, चौक, चारबाग, इंदिरानगर, आलमबाग, अमौसी में वायु व ध्वनि प्रदूषण की निगरानी कराई। रिपोर्ट के अनुसार, चारबाग में सबसे अधिक पटाखे फोड़े गए। इससे प्रदूषण और शोर सबसे ज्यादा यहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, सल्फर डाई ऑक्साइड का औसत स्तर दीपावली के दिन 74.8 फीसदी बढ़ गया। हालांकि, 38.1 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर का यह स्तर मानक 80 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर से कम है। चारबाग में सबसे अधिक 47.4 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर सल्फर डाई ऑक्साइड का स्तर रहा। नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड भी यहां सबसे अधिक रिकॉर्ड हुआ। ध्वनि प्रदूषण भी सबसे अधिक 98.4 डेसीबल मिला। यह तभी संभव है कि जब पटाखे सबसे अधिक जलाए गए हों। जबकि, पूरे शहर का ध्वनि प्रदूषण दीपावली की रात 84.1 डेसीबल था।

पीएम-10 का स्तर चार गुना से अधिक तक बढ़ गया
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां दीपावली पर रात के समय पीएम-10 का स्तर 725.7 से लेकर 1084.2 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर मिला। वहीं, यह दिन में और दीपावली पूर्व में 169.1 से 315.4 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर के बीच था। पीएम-10 का स्तर करीब चार गुना से अधिक तक बढ़ गया। नैक्स के मानक 100 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर से भी यह बहुत अधिक है। पीएम-2.5 का स्तर भी इसी अनुपात में बढ़ा हुआ रहा। हालांकि, दीपावली के बाद इसमें पूर्व की तरह कमी रिकॉर्ड हुई। सर्वे करने वाली टीम के प्रभारी व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. जीसी किस्कू का रिपोर्ट में कहना है कि परंपरागत पटाखों में उपयोग होने वाले केमिकल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed