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प्रदूषण, सिर की चोट और शराब भी अल्जाइमर की वजह
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सचिन त्रिपाठी
वायु प्रदूषण से सांस संबंधी रोग के साथ ही बुजुर्गों में याददाश्त कमजोर होने तथा भूलने की बीमारी भी हो सकती है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लांसेट कमीशन की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्गों में होने वाली अल्जाइमर और डिमेंशिया बीमारी मुख्य रूप से कम शिक्षा, हाइपरटेंशन, धूम्रपान, अवसाद, कम शारीरिक श्रम, सामाजिक एकाकीपन आदि की वजह से होती है। अब इसमें तीन नये रिस्क फैक्टर, वायु प्रदूषण, शराब का ज्यादा सेवन तथा सिर की चोट भी बढ़े हैं।
केजीएमयू के वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि भारत में इस समय 60 साल से अधिक आयु के 2.7 प्रतिशत लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। मस्तिष्क की तंत्रिका को प्रभावित करने वाला यह रोग बुढ़ापे में ज्यादा होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त बहुत कमजोर हो जाती है। अल्जाइमर को एक प्रकार का डिमेंशिया भी कहते हैं। फिलहाल यह लाइलाज बीमारी है। जो दवाएं हैं भी वे सिर्फ इसका प्रभाव कम कर सकती हैं, इसलिए इलाज से ज्यादा इसकी रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत है।
ज्यादा शराब हो सकती है खतरनाक
रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा शराब का सेवन डिमेंशिया या अल्जाइमर का कारण बन सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए वायु प्रदूषण से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही बीपी के सामान्य स्तर को बनाए रखने, सिर की चोट से बचाव, सुनने में समस्या होने पर मशीन का उपयोग करने, धूम्रपान से दूर रहने, दोस्तों तथा रिश्तेदारों के साथ समय बिताने तथा उनसे बातचीत का प्रयास करते रहना चाहिए।
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भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले
प्रो. श्रीकांत ने बताया कि कम और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में यह बीमारी उच्च आय वर्ग वाले देशों के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है। विश्व में इस समय 60 वर्ष से ज्यादा आयु वाले लोगों में इस बीमारी का प्रतिशत करीब पांच फीसदी है।
अल्जाइमर और डिमेंशिया के कारण :
मधुमेह की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, वायु प्रदूषण, धूम्रपान, कम शिक्षा, हायपरटेंशन, अवसाद, कम शारीरिक श्रम, सामाजिक एकाकीपन, सिर की पुरानी चोट, शराब, अनिंद्रा, आनुवांशिक यानि पारिवारिक इतिहास।
अल्जाइमर के लक्षण :
शुरुआती लक्षण-
समय का ध्यान नहीं होना, चीजों को खो देना, खराब अनुमान के कारण गलत फैसला लेना, रोजाना के कार्यों को समय पर पूरा न कर पाना, सामाजिक कार्यों से अलग रहना, बातचीत करने में समस्या।
द्वितीयक लक्षण-
बिना वजह गुस्सा, दोस्तों और परिवार के सदस्यों को पहचानने में समस्या, लिखने-पढ़ने में समस्या, रोना, चिंता, भटकना, बेचैनी आदि।
गंभीर लक्षण :
वजन कम होना, दौरे पड़ना, निगलने में परेशानी, पेशाब में कमी होना।
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वायु प्रदूषण से सांस संबंधी रोग के साथ ही बुजुर्गों में याददाश्त कमजोर होने तथा भूलने की बीमारी भी हो सकती है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लांसेट कमीशन की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्गों में होने वाली अल्जाइमर और डिमेंशिया बीमारी मुख्य रूप से कम शिक्षा, हाइपरटेंशन, धूम्रपान, अवसाद, कम शारीरिक श्रम, सामाजिक एकाकीपन आदि की वजह से होती है। अब इसमें तीन नये रिस्क फैक्टर, वायु प्रदूषण, शराब का ज्यादा सेवन तथा सिर की चोट भी बढ़े हैं।
केजीएमयू के वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि भारत में इस समय 60 साल से अधिक आयु के 2.7 प्रतिशत लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। मस्तिष्क की तंत्रिका को प्रभावित करने वाला यह रोग बुढ़ापे में ज्यादा होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त बहुत कमजोर हो जाती है। अल्जाइमर को एक प्रकार का डिमेंशिया भी कहते हैं। फिलहाल यह लाइलाज बीमारी है। जो दवाएं हैं भी वे सिर्फ इसका प्रभाव कम कर सकती हैं, इसलिए इलाज से ज्यादा इसकी रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत है।
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ज्यादा शराब हो सकती है खतरनाक
रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा शराब का सेवन डिमेंशिया या अल्जाइमर का कारण बन सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए वायु प्रदूषण से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही बीपी के सामान्य स्तर को बनाए रखने, सिर की चोट से बचाव, सुनने में समस्या होने पर मशीन का उपयोग करने, धूम्रपान से दूर रहने, दोस्तों तथा रिश्तेदारों के साथ समय बिताने तथा उनसे बातचीत का प्रयास करते रहना चाहिए।
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भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले
प्रो. श्रीकांत ने बताया कि कम और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में यह बीमारी उच्च आय वर्ग वाले देशों के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है। विश्व में इस समय 60 वर्ष से ज्यादा आयु वाले लोगों में इस बीमारी का प्रतिशत करीब पांच फीसदी है।
अल्जाइमर और डिमेंशिया के कारण :
मधुमेह की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, वायु प्रदूषण, धूम्रपान, कम शिक्षा, हायपरटेंशन, अवसाद, कम शारीरिक श्रम, सामाजिक एकाकीपन, सिर की पुरानी चोट, शराब, अनिंद्रा, आनुवांशिक यानि पारिवारिक इतिहास।
अल्जाइमर के लक्षण :
शुरुआती लक्षण-
समय का ध्यान नहीं होना, चीजों को खो देना, खराब अनुमान के कारण गलत फैसला लेना, रोजाना के कार्यों को समय पर पूरा न कर पाना, सामाजिक कार्यों से अलग रहना, बातचीत करने में समस्या।
द्वितीयक लक्षण-
बिना वजह गुस्सा, दोस्तों और परिवार के सदस्यों को पहचानने में समस्या, लिखने-पढ़ने में समस्या, रोना, चिंता, भटकना, बेचैनी आदि।
गंभीर लक्षण :
वजन कम होना, दौरे पड़ना, निगलने में परेशानी, पेशाब में कमी होना।