फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Politicians are backing prisoners in jail.

जेलों में बंद कैदियों को सत्ता व सियासत से मिल रही ताकत

Sun, 03 Apr 2016 03:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 03 Apr 2016 03:03 AM IST
विज्ञापन
Politicians are backing prisoners in jail.

सूबे की जेलों में बंद कैदियों को सत्ता और सियासत से ताकत मिल रही है। इसी का नतीजा है कि कभी जेल अफसरों की हुंकार पर बैरकों में दुबक जाने वाले कैदी अब हर ऊंची आवाज से टकराने लगे हैं। वे बंदीरक्षक तो क्या, जेलर तक की नहीं सुनते। जेलकर्मियों से मारपीट और हिंसा आम बात हो गई है।

विज्ञापन


कैदियों पर काबू पाने के लिए कभी पीएसी तो कभी पुलिस की मदद लेनी पड़ी, लेकिन इन पर प्रभावी अंकुश लगाने की कोई ठोस पहल अभी तक सामने नहीं आई है।

जेल अधिकारियों के मुताबिक पिछले चार साल के दौरान कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, फतेहगढ़, फीरोजाबाद, मऊ, बस्ती, मेरठ, मुजफ्फरनगर जेल को मिलाकर हिंसा की दो दर्जन से अधिक वारदात हो चुकी हैं। अधिकतर मामलों में जेलकर्मियों को ही दंडित किया गया और अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया।
विज्ञापन


जहां तक कैदियों का सवाल है तो लगभग सभी मामलों में जेल बदलने के अलावा और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सूबे की जेलों में हिंसा भड़कने का सिलसिला वर्षों पुराना है। सपा सरकार मार्च 2012 में सत्ता आई थी और इसके एक महीने के अंदर ही बस्ती, मऊ, बिजनौर और मेरठ जेल में हिंसा की वारदात हुई। मार्च 2012 में बस्ती जेल में हुई हिंसा में कैदियों ने न सिर्फ बैरकों के गेट तोड़ दिए, बल्कि जेल के किचन में आग भी लगा दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

मेरठ जेल में हिंसा में 20 लोग हुए थे घायल

Politicians are backing prisoners in jail.

वहीं, मेरठ जेल में अप्रैल 2012 में हुई हिंसा में लगभग बीस लोग घायल हो गए थे, जिनमें 13 जेलकर्मी थे। मनबढ़ कैदियों ने जेल अधीक्षक के कार्यालय में आग लगा दी थी। ऐसे ही अन्य जेलों में भी हिंसा के दौरान कैदी आगजनी व खून-खराबे पर आमादा हो गए थे।

मार्च 2015 में एटा जेल में हिंसा भड़की थी। सितंबर 2015 में मुजफ्फरनगर जेल में हिंसा तब भड़क उठी थी, जब बाहुबली मुख्तार अंसारी के एक समर्थक पर हमला हो गया था। इसमें छह कैदी घायल हुए थे। वहीं गत फरवरी में एक कैदी की मौत पर कन्नौज जेल में कैदी भड़क उठे थे और जमकर हिंसा हुई थी।

जेलों में क्षमता से अधिक हैं कैदी
यूपी की लगभग सभी जेलों में क्षमता से कहीं अधिक कैदी बंद हैं। कारागार प्रशासन के आला अफसरों का कहना है कि जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या और कर्मियों की कमी की वजह से स्थिति बिगड़ने पर उसे तत्काल संभालने में दिक्कत आती है और हालात बेकाबू हो जाते हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 89,537 कैदी यूपी की जेलों में बंद हैं जबकि इनकी क्षमता महज 52,780 कैदियों की है।

पैसे की बदौलत मोबाइल से लेकर तमंचा तक कर लेते हैं हासिल

Politicians are backing prisoners in jail.

सूबे की जेलों में बंद कैदी कर्मचारियों की मुट्ठी गर्म करके शराब, मुर्गा और मोबाइल फोन से लेकर पिस्तौल और तमंचे तक हासिल कर लेते हैं। जानकारों की मानें तो सबके अलग रेट तय हैं। वहीं धनाढ्य, रसूखदार, दबंग व माफिया टाइप के कैदियों की हनक में आकर जेलकर्मी खुद ही उन्हें सारी सुविधाएं मुहैया कराते हैं। पिछले साल मथुरा जेल में गैंगवार के दौरान गोलियां चली थीं। इसमें जेलकर्मी ने ही कैदी को पिस्तौल पहुंचाई थी।

समय-समय पर होने वाली जेलों की चेकिंग में मोबाइल, सिम कार्ड, चाकू, कैंची, चरस, गांजा, शराब या अन्य मादक पदार्थ बरामद होना आम बात है। हाल ही मुजफ्फरनगर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने जेल में छापा मारा तो 22 सिम कार्ड, चाकू और गांजा बरामद हुआ।

जेल पहुंचते ही अस्पताल में दाखिल होने की कवायद
रसूखदार अपराधी के जेल पहुंचते ही वहां के डॉक्टर उनके लिए सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं कि उनका अस्पताल में रहकर इलाज कराया जाना जरूरी है। इस व्यवस्था पर अदालत भी नाराजगी जता चुकी है। उसने पिछले साल पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा व कुछ अन्य रसूखदारों के अस्पताल में रहने की जानकारी पर शासन से जवाब भी तलब किया था।

जेलों से चलाते हैं आपराधिक गतिविधियां

Politicians are backing prisoners in jail.

जेल में रहकर शातिर अपराधी हर तरह की आपराधिक  गतिविधियां चलाते रहते हैं। कुछ दिनों पहले एसटीएफ ने विभिन्न जेलों में बंद कुछ शातिर अपराधियों द्वारा हत्या व वसूली के लिए रची जा रही साजिश के बारे में आला अफसरों को अवगत कराया था, साथ ही इनकी जेल बदलने का आग्रह भी किया था। यह सुझाव भी दिया था कि अगर जेल बदलने में दिक्कत आए तो चिह्नित कैदियों को तनहाई में रखा जाए, जिससे वे कोई वारदात न करा सकें।

कार्रवाई पर जेल अधिकारियों को गंवानी पड़ी जान
जेल के अधिकारियों-कर्मचारियों के आपसी गठजोड़ से सब कुछ मैनेज हो जाता है। यदि कोई जेल अधिकारी इस नेक्सस में शामिल नहीं होता है और रसूखदारों या माफिया पर सख्ती करने पर आमादा हो जाता है तो उसे रास्ते से हटाने में भी लोग पीछे नहीं रहते। पूर्व में कई जेल अधिकारियों को इस वजह से अपनी जान तक गंवानी पड़ी।
 
फैक्ट फाइल
जिला जेल--67
सेंट्रल जेल--05
मॉडल जेल--01
नारी बंदी निकेतन--01
उप जेल--03

किशोर सदन--01
कुल जेल--89
जेलों की कुल क्षमता--52,780 कैदी
जेलों में बंद--89,537 कैदी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed