योगी तो महज मोहरा, जानिए भाजपा की असली चाल!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
योगी आदित्यनाथ कुछ दिनों से चर्चा में हैं। न्यूज चैनल से लेकर अखबारों तक में। पहले एक विवादित बयान वाली सीडी को लेकर तो बाद में लव जेहाद का मुद्दा उठाकर और अब एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कही गई बातों को लेकर।
वैसे तो सीडी का बयान बहुत पहले का है। पर, उसमें योगी को जो कुछ कहते दिखाया गया है वह महत्वपूर्ण है। इसमें योगी कह रहे हैं कि कोई अगर हिंदू लड़की को जबरिया ले जाएगा, उसका धर्मपरिवर्तन कराएगा तो उसके यहां की 100 लड़कियों को ले आया जाएगा।
हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि ज्यादा दंगे वही होते हैं, जहां अल्पसंख्यक ज्यादा होते हैं। लव जेहाद पर उनका बयान आया है कि चुनाव में यह मुद्दा रहेगा।
भाजपा चाहती है ये बवाल?
इन बयानों को लेकर विपक्ष ने योगी को निशाने पर ले रखा है। उन्हें मुस्लिम विरोधी बताकर हमला कर रहा है। सांप्रदायिक बताकर आलोचना कर रहा है। दूसरी तरफ योगी हों या उनकी पार्टी भाजपा, किसी तरफ से इस पर सफाई देने की कोशिश नहीं हो रही है। मानों वह तो चाहते ही हों कि इस तरह की बातें उठें।
विधानसभा की 11 और लोकसभा की एक सीट के उपचुनाव की घोषणा के बीच उठे इस मामले ने लोकसभा चुनाव के दौरान सहारनपुर में चुनाव लड़े रहे कांग्रेस के उम्मीदवार की मोदी की बोटी-बोटी काट देने के बयान वाली सीडी की याद दिला दी है। इस सबसे साफ है कि इस मामले में पक्ष व विपक्ष दोनों वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि हमला उनकी तरफ से शुरू हुए हैं जो खुद घोर सांप्रदायिक हैं। हमेशा जनता को वोट बैंक समझकर काम करते हैं। जो सरकारी योजनाओं को लागू करने में धर्म के आधार पर भेदभाव करते हैं। भाजपा को ऐसे लोगों के आरोपों की चिंता नहीं है। भाजपा कह चुकी है कि सबका साथ और सबका विकास। न्याय सबको, लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं।
जानिए, क्या है पीछे की वजह
राजनीतिक समीक्षक भी मानते हैं कि लव जिहाद, फिर धर्म परिवर्तन पर बवाल...यह सब अकस्मात नहीं हो रहा है। योगी तो बहाना भर हैं। इसके पीछे अपने-अपने मकसद हैं। शुरुआत किसी की तरफ से हुई हो लेकिन इस सबके पीछे है अपनी-अपनी राजनीतिक इच्छाएं पूरी करने की जद्दोजहद।
भाजपा व उसके विरोधी, दोनों को इसमें अपना लाभ दिख रहा है। वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं कि यह बात गौर करने वाली है कि योगी को लेकर इस तरह की बातों पर सबसे ज्यादा चर्चा उस दिन से शुरू हुई जिस दिन से भाजपा की तरफ से उपचुनाव में योगी को मुख्य प्रचारक बनाकर उनकी सभाएं करने की खबरें सार्वजनिक हुईं।
साफ है कि दोनों पक्षों को योगी का चेहरा रास आ रहा है। भाजपा विरोधी दलों की बात करें तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली भारी जीत से वे चिंतित हैं।
ध्रुवीकरण के लिए दिया जा रहा तूल
इस चिंता से मुक्ति के लिए इन्हें एकमात्र उपाय वोटों का ध्रुवीकरण ही दिखता है। इसीलिए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। दूसरी तरफ भाजपा को बिन बोले अपना मकसद पूरा होता दिख रहा है।
सच्चाई को समझे बगैर मुद्दे को हवा दी जा रही है। सच्चाई तो यही है कि योगी ने कोई नई बात नहीं कही है। यह बातें बहुत पहले से सोशल मीडिया के जरिये चलती रही हैं।
योगी पहले भी इससे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। मैसेज पर भी इस तरह की बातें आती रहती हैं। पर, इस समय चुनाव है तो ज्यादा तूल दिया जा रहा है।
फिर हिंदू बनाम मुस्लिम की ओर?
लाल की बात सही लगती है। पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो साफ नजर आता है कि योगी के बयानों की पुरानी सीडी को इस समय चर्चा में लाना यूं ही नहीं है।
जहां तक भाजपा की तरफ से इसका जोरदार खंडन न करने की बात है तो भगवा रणनीतिकारों को पता है कि योगी व भाजपा को विपक्ष की तरफ से बनाए जा रहे हिंदू हितैषी चेहरे से नुकसान होने के बजाय लाभ ही होना है।
जब योगी व भाजपा का काम विपक्ष ही कर रहा है तो उन्हें करने की जरूरत ही क्या। भगवा टोली के रणीतिकारों का अनुभव है कि लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष की तरफ से भाजपा व मोदी की मुस्लिम विरोधी छवि गढ़ने की कोशिश से उनका लाभ ही हुआ है। इसलिए अगर उपचुनाव के दौरान वही पुनरावृत्ति होती दिख रही है तो उस पर क्यों बोलें।
पर नहीं किया जा सकता बंटवारा
लोकसभा चुनाव के दौरान सूबे के पश्चिमी छोर पर स्थित सहारनपुर में सीडी का उदय तो अब उपचुनाव में सूबे की पूर्वी छोर पर स्थित गोरखपुर में सीडी का सामने आना, इस तरह की घटनाओं को गंभीर भी बनाती हैं।
इसके पीछे चाहे जो लोग हों लेकिन इनकी कोशिश सिर्फ वोटों का ध्रुवीकरण करना भर नहीं बल्कि समाज में खाई भी पैदा करना है। हालांकि रतनमणि लाल कहते हैं कि भारत लोकतांत्रिक देश है।
इस देश में कई ऐसे जिले व प्रदेश हैं, जहां अल्पसंख्यकों की अच्छी-खासी तादाद है। पर, वहां कुछ नहीं होता। इसलिए योगी भले ही यह कह रहे हों कि ज्यादा दंगे वहीं होते हैं जहां अल्पसंख्यक ज्यादा हैं, कतई सही नहीं है।
इस तरह की बातों को बहुत तूल भी नहीं देना चाहिए। इन बातों से भले ही किसी को चुनावी लाभ हो जाए लेकिन भारतीय समाज में बंटवारा नहीं किया जा सकता।