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मुस्लिम मतों के लिए छिड़ी जंग, 'भगवा सेना' भी बेकरार

Wed, 09 Dec 2015 12:48 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 09 Dec 2015 12:48 AM IST
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Political paties plan for UP assembly election.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कह रहे हैं, ‘सपा तो किसी से गठबंधन नहीं करेगी, पर बसपा-सपा में गठबंधन हो सकता है।’ उधर, बसपा प्रमुख मायावती कह रही हैं, ‘बसपा किसी से भी गठबंधन नहीं करेगी, पर सूबे में सपा और भाजपा के बीच आंतरिक गठबंधन है। सपा गठबंधन की अटकलों को झूठे तरीके से फैला रही है।’

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दो प्रमुख पार्टियों के नेताओं के बयान भले ही गठबंधन को लेकर हों, लेकिन इनके पीछे कहीं न कहीं सूबे में 2017 के चुनावी संग्राम के लिए वोटों की गणित के समीकरण और मुस्लिम वोटों की चिंता ही झलक रही है।
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वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत का यह कहना, ‘संघ मुसलमानों का दुश्मन नहीं है’ और संसद में केंद्र सरकार का यह आश्वासन, ‘अयोध्या में न्यायालय के निर्देशानुसार ही काम किया जाएगा’ यह बताने के लिए पर्याप्त है कि मुस्लिम मतों को लेकर भगवा टोली में भी कम उधेड़बुन नहीं है।
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रही बात कांग्रेस की, तो उसकी तरफ से जब-तब मुसलमानों को आरक्षण और उनको विशेष सुविधाओं के जरिये यह कोशिश दिखाई दे ही जाती है।

भाजपा की चाहत, अछूत न समझें मुसलमान

Political paties plan for UP assembly election.

सपा, बसपा और कांग्रेस की कोशिश 2017 में मुसलमानों को अपने-अपने पाले में बांधे रखने की है, जबकि भगवा टोली की कोशिश इनका किसी एक पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण न होने देने की है। साथ ही यह भी चाहती है कि मुसलमान भले ही उसे वोट कम दें, लेकिन अछूत न समझें।

राजनीतिक समीक्षक  भी कहते हैं कि गठबंधन के आरोप-प्रत्यारोप बहानों से ज्यादा कुछ नहीं लगते। कारण, भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को छोड़ दें तो सूबे में कोई किसी के लिए अछूता नहीं रहा है।

सपा, बसपा व भाजपा रह चुकीं साथ-साथ
वर्ष 1993 में सपा और बसपा एक-दूसरे के साथ रह चुकी हैं। 1995, 1997 और 2002 में भाजपा व बसपा में गठबंधन रह चुका है। 1989 में  सपा और भाजपा भी एक साथ रह चुकी हैं।

इसलिए सपा और बसपा आज एक-दूसरे पर भाजपा से गठबंधन का आरोप लगा रही हैं तो इसके पीछे सिर्फ मुस्लिम वोटों की लामबंदी ही वजह लगती है।

इसलिए बोले जा रहे ऐसे बोल

Political paties plan for UP assembly election.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, प्रदेश में 21 प्रतिशत सामान्य और 54 प्रतिशत पिछड़ों यानी कुल 75 प्रतिशत आबादी में 19 प्रतिशत मुस्लिम हैं। सपा और बसपा दोनों को लगता है कि भाजपा से दूरी दिखाकर और उस पर हमला बोलकर मुसलमानों को आसानी से अपने पक्ष में लामबंद किया जा सकता है। साथ ही एक-दूसरे पर भाजपा से मिले होने का आरोप लगाकर मुस्लिम मतदाताओं को उसके पक्ष में जाने से रोका जा सकता है।

यह भी है बानगी
अभी 6 दिसंबर पर जिस तरह आजम व मायावती जैसे धुर सियासी विरोधियों के सुर लगभग एक जैसे रहे, उससे भी यह बात साबित होती है। आजम ने कहा, ‘भाजपा अगर उसी स्थान पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करा दे तो वे आरएसएस व भाजपा को आश्वस्त करते हैं कि सभी मुसलमान बार-बार भाजपा की सरकार बनवाएंगे।’

वहीं, मायावती ने अंबेडकर की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के बहाने विवादित ढांचे को बाबरी मस्जिद बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा, ‘सांप्रदायिक ताकतों ने उन अंबेडकर की पुण्यतिथि पर बाबरी मस्जिद गिराई जो कि धर्मनिरपेक्ष थे।’

यही नहीं, आमिर खान के बहाने पहले सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने यह बोलकर कि आमिर प्रदेश में आकर कहीं भी रहें, सरकार उनकी सुरक्षा करेगी। और अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की आमिर खान को सैफई बुलाने की बात से भी साफ लगता है कि प्रदेश में मुस्लिम वोटों के सहारे सत्ता की चाभी हासिल करने की कोशिश शुरू हो गई है।

यूपी में ये है जातियों का समीकरण

Political paties plan for UP assembly election.

प्रदेश की आबादी में सामान्य जातियां लगभग 21 प्रतिशत (ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य व कायस्थ)

प्रदेश की आबादी में पिछड़ी जातियां लगभग 54 प्रतिशत (यादव, कुर्मी, लोध, गड़रिया, पाल, कुशवाहा, राजभर समेत लगभग 79 जातियां)

प्रदेश की आबादी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति लगभग 25 प्रतिशत (जाटव, धुसिया, पासी, धोबी आदि 66 से अधिक जातियां)

मुसलमान: प्रदेश में 21 प्रतिशत सामान्य और 54 प्रतिशत पिछड़ों अर्थात कुल आबादी के 75 प्रतिशत हिस्से में ही लगभग 19 प्रतिशत मुसलमान

अलग-अलग गणित

सपा की निगाह: आबादी में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले यादव। पिछड़ों की 54 प्रतिशत आबादी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली राजभर, निषाद, मल्लाह, कहार, कश्यप, कुम्हार, धीमर, बिंद, प्रजापति, धीवर, भर, केवट, बाथम, मछुआ, तुरहा, मांझी और गौंड जैसी जातियां। मुस्लिम 19 प्रतिशत। इसके साथ सामान्य और अति पिछड़ी बाकी कुछ जातियों में  सेंधमारी के साथ जीत का इंतजाम।

बसपा की निगाह: लगभग 13 प्रतिशत जाटव। 19 प्रतिशत मुसलमान। गैर जाटव 12 प्रतिशत आबादी और 21 प्रतिशत सामान्य में सेंधमारी के साथ जीत की गणित।

भाजपा  की  निगाह: 21 प्रतिशत सामान्य जातियां। 44 प्रतिशत अति पिछड़ी जातियां। गैर जाटव 12 प्रतिशत अनुसूचित जाति। 19 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं की लामबंदी रोकना।

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