फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   political parties and varanasi seat

काशी: आखिर किसके सिर बांधेगी जीत का सेहरा

Sun, 11 May 2014 01:01 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 11 May 2014 01:01 PM IST
विज्ञापन
political parties and varanasi seat

काशी में दो महीने से चल रहा चुनावी शोर शांत हो गया। कभी रोड शो तो कभी सभाओं और कभी चौराहों पर जवाबी नारों से मुकाबले के दौर भी थम गए।

विज्ञापन


अब सरोकारों से जुड़े सवालों पर फैसला सुनाने का वक्त आ गया है। मतदान शुरू होने में 24 घंटे बचे हैं।

उसके बाद प्रारब्ध में लिखे हुए को भी बदल देने का सामर्थ्य रखने वाले बाबा विश्वनाथ की धरती के लोग नरेंद्र मोदी से लेकर अरविंद केजरीवाल, अजय राय, कैलाश चौरसिया सहित अन्य उम्मीदवारों का भाग्य लिख देंगे।
विज्ञापन


काशी को तो कोई जीत ही नहीं सकता, इसलिए कौन जीतेगा, यह सवाल बेमानी है। असली सवाल यह है कि काशी किसे जिताएगी?

कोई भी हो सकता है दो नंबर पर

political parties and varanasi seat

मोदी का विरोध करने वाले दूसरे साहब नाम पूछने पर कहते हैं कि सिर्फ इलाका लिख लो।

यह साहब रुस्तम से भी कहते हैं कि अपना नाम कटवा दो। हालांकि रुस्तम कहते हैं कि गंगा और शिवजी किसी से नहीं डरे, तो मैं क्यों डरूं। मोदी को मैं अच्छा आदमी नहीं मानता लेकिन सच्चाई यही है कि वह जीत रहे हैं।

यह पूछने पर कि मोदी की लड़ाई आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में किससे होगी? दोनों लोग कहते हैं कि यह बनारस है। यहां जो दिखता है, वही नहीं होता।

जुलूस में भीड़ से कोई नतीजा न निकालिएगा। कोई भी दो नंबर पर हो सकता है। मुस्लिम वोट किसी एक को मिलने नहीं जा रहा है।

मुस्लिम मतों पर है निर्भर

political parties and varanasi seat

हरिश्चंद्र घाट की तरफ से घूमते हुए केदार घाट की तरफ गली में एक विद्यालय के पास फूलों की दुकान पर भी काशी की सियासत ही चर्चा में है।

लोग रोड शो के दौरान लगने वाले नारों का विश्लेषण कर रहे हैं। एक नौजवान अनिल कहता है आप के जुलूस में नारे बहुत ही खराब लग रहे थे।

कहा जा रहा है, मोदी-मोदी बोलेगा, वह झाड़ू-झाड़ू खाएगा। पास में खड़े एक अन्य युवक ने कहा कि बात सही है।

अब अगर हम लोग मोदी को भूल गए तो झाड़ू तो खाना ही पड़ेगा। मुलायम व मायावती अपने दम पर दिल्ली में सरकार बना नहीं सकते।

राधे माली नाम के बुजुर्गवार मुस्करा देते हैं। पूछता हूं नंबर एक व नंबर दो पर कौन रहेगा, कहते हैं- एक नंबर पर तो मोदी ही रहेंगे।

दूसरे नंबर पर चांस आधे-आधे हैं। मुस्लिम वोट जिसे ज्यादा मिलेगा। वही रनर होगा। वैसे अजय राय के तमाम लोगों से निजी रिश्ते हैं। इसका फायदा उन्हें मिलेगा।

विज्ञापन

सबकी अपनी-अपनी ख्वाहिश है

political parties and varanasi seat

दशाश्वमेध घाट पर गंगा किनारे बैठे कई लोग चुनावी चर्चा में व्यस्त दिखते हैं।

जैसे ही चुनावी नब्ज टटोलने की कोशिश करता हूं, खुद को वाराणसी का प्रमुख गोताखोर बताने वाले भाई लाल साहनी कहते हैं, मोदी बाबू को वोट मिलेगा। दूसरे नंबर पर अजय राय रहेंगे। दो-तीन लोग बोल पड़ते हैं कि केजरीवाल भी दूसरे नंबर पर रह सकते हैं।

साहनी का तर्क आता है कि मुस्लिम भाई अजय राय के साथ ही जाएंगे। आगे बढ़ने लगता हूं तो साहनी अपने आठ साल के बेटे कर्ण व पांच साल की पुत्री जानू की ओर अंगुली उठाते हुए कहता है, मोदी बाबू के लिए अपने अखबार में हमारी यह बात लिख दीजिए कि वह जीतने के बाद गोताखोरों की जल पुलिस में भर्ती कराने का आदेश जरूर करा दें।

जिससे हमारे बच्चे भी पढ़ लिख सकें। सीढ़ियां चढ़ने लगता हूं तो पास आकर एक सज्जन कान में कहते हैं कि केजरीवाल को कम मानना गलत है।

प्रतिबद्धता बरकरार तो संशय भी कम नहीं

political parties and varanasi seat

काशी विश्वनाथ मंदिर के पास खड़े कुछ बुजुर्ग कांग्रेस के भविष्य की चिंता में मगन है। पूछने पर पता चलता है कि उनमें पंडित कमला पति त्रिपाठी के शिष्य रहे पूर्व विधायक कैलाश टंडन भी हैं।

ये लोग उसी सवाल में उलझे दिखे जिस सवाल का जवाब तलाशते हुए मैं घूम रहा था। इन लोगों के बीच भी बात मुस्लिम मतदाताओं के रुख पर ही हो रही थी। निष्कर्ष भी वैसा ही कि मुसलमानों के वोट से काशी की लड़ाई तय होगी।

परिचय दिया तो टंडन जी ने तर्क दिया कि यहां कांग्रेस का कमिटेड वोट 65 हजार है। यह अजय राय को ही मिलेगा। आप के रोड शो में मुसलमानों को देखकर यह न समझिएगा कि उनका सब वोट केजरीवाल को मिल जाएगा।

इसी बीच, किसी ने कहा कि कांग्रेस मैदान में तो दिख नही रही। वह कहते हैं कि इससे फर्क नहीं पड़ता।

उम्मीदें हैं ‘आप’ से

political parties and varanasi seat

काशी के युवा कहते हैं कि मोदी की हवा ऐसे ही बनाई गई है। हालांकि उसकी बात एक दूसरा युवा काट देता है।

पहला तर्क देता है, मोदी चाहते तो विश्वनाथ मंदिर आ सकते थे। नहीं आए। वह चाहते तो पहले आकर गंगा आरती कर सकते थे, नहीं की।

इसलिए यह कैसे मान लिया जाए कि मोदी को काशी से पूरा लगाव है। पर, आप लोग मोदी-मोदी कर रहे हैं। मोदी की लड़ाई उसी से होगी। वोट के सवाल पर ये युवक चुप हो जाते हैं।

रास्ते में रिक्शा चालक रामकुमार से बात होती है तो वह कहता है, बाबू नया सबेरा आने वाला है। झाड़ू सबकी सफाई करेगा। तभी काशी भी साफ होगी और अपनी गंगा मैया भी। कहता है कि मोदी व केजरीवाल में ही लड़ाई होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed