‘मंत्रीजी, दोहा रहीम नहीं कबीरदास का है...’
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नरेंद्र मोदी पर तंज कसने के लिए लोकसभा प्रत्याशी अभिषेक मिश्र
जिसे सुन कुर्सियों पर बैठे लोग खुश हो गए। पर अगले ही मिनट जब उन्होंने कबीरदास का दोहा रहीमदास के नाम से सुनाया तो लोगों में उनके ज्ञान को लेकर सुगबुगहाट शुरू हो गई।
मौका
था, गुरुवार को जेमिनी कॉन्टिनेंटल में आयोजित राष्ट्रीय गांधी तैलिक साहू
राठौर महासभा की बैठक का।
जहां समाजवादी पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मिश्र
विपक्षियों को कोस रहे थे और सपा की उपलब्धियों को गिना रहे थे। शुरुआत
उन्होंने नरेन्द्र मोदी से की, जिसके लिए जर्मनी की कहावत अंग्रेजी व हिंदी
दोनों भाषाओं में सुनाई।
इसके बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी
वाजपेई पर निशाना साधते हुए कहा कि वह पांच बार सांसद रहे, पर लखनऊ के लिए
क्या खास किया।
कन्वेंशन सेंटर भी बनवाया तो आधा-अधूरा। ऐसे बड़े नेता की
लखनऊवालों को क्या जरूरत।
उन्होंने आगे कहा कि ‘रहीमदास’ कहते हैं ‘बड़ा
हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर’।
जिसे सुन हाल में बैठे लोगों में सुगबुगाहट शुरू हो गई कि दोहा तो कबीरदास
का है, लेकिन मंत्रीजी को जानकारी नहीं।