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रोटी और छत से पहले कथक
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 30 Jun 2014 10:33 AM IST
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सरकार को इशारों पर नचाने वाली नौकरशाही भी कमाल के आइडिया लाती है।
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असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बच्चों को भले ही रहने के लिए छत, पेट भरने के लिए दो वक्त का सही खाना और बेहतर शिक्षा न मिलती हो, लेकिन उनकी प्रतिभा निखारने के लिए एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने नायाब योजना बना डाली।
करोड़ों के बजट से मजदूरों के बच्चों को कथक सिखाने की प्लानिंग तैयार की गई है। एक स्वयंसेवी संस्था का नाम भी आगे आया। तर्क है कि इससे बच्चों का बहुमुखी विकास होगा।
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वामपंथी मिजाज के एक श्रमिक नेता को योजना की भनक लगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘अधिकारी बच्चों का विकास चाहते हैं या किसी और का ?
देखना है कि समाजवादी सरकार की प्राथमिकता रोजी, रोटी, छत और शिक्षा है या कुपोषण का शिकार बच्चों को कत्थक सिखाना।’