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तू डाल-डाल, मैं पात-पात
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 02 Jun 2014 08:59 AM IST
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भाजपा में डाल-डाल और पात-पात का खेल लगातार जारी है। मोदी मौन रहकर यह खेल खेलने के माहिर हैं तो एक दूसरे कद्दावर नेता को भी इसी कला में महारत हासिल है।
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ताजा मामला मंत्रिपरिषद के गठन का है। एक दिन यह खबर चली कि मोदी अपने मंत्रिपरिषद में 70 से ऊपर का कोई आदमी नहीं लेंगे, तो नेताजी को लगा कि मुराद पूरी हो रही है।
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पूर्वांचल वाले पंडितजी चुनाव भले ही जीत गए हों लेकिन मंत्री तो नहीं ही बन पाएंगे। लगे मैसेज देने कि वह पंडितजी को मंत्री बनवाना चाहते हैं। नेताजी के नजदीकी लोगों की मानें तो निशाने दो थे।
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एक तो पंडितजी का नाम चलाने से मंत्री बनने के प्रबल दावेदार नेताजी के सजातीय बंधु का पत्ता कट जाएगा, दूसरे ब्राह्मणों के बीच नेताजी की छवि भी ठीक हो जाएगी।
मोदी को शायद इसका एहसास पहले से ही था। नहले पर दहला मारा और नेताजी की इच्छा का सम्मान करने का तर्क देते हुए पंडितजी को मंत्री बनाने का फैसला ले लिया।
नेताजी भी कम नहीं, सो अपने कुछ अखबारी मित्रों की मदद ली। खबर छपी कि मोदीजी तो पंडितजी को राज्यमंत्री ही बनाना चाहते थे।
पर, नेताजी ने उनकी वरिष्ठता का तर्क देकर कैबिनेट बनवा दिया। देखना है कि डाल-डाल, पात-पात के इस खेल में आगे कौन बाजी मारता है।