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पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने का क्या है सियासी गणित, जानें

Sun, 05 Mar 2017 12:44 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 05 Mar 2017 12:44 PM IST
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political analysis of purvanchal
मायावती - फोटो : amar ujala
बुंदेलखंड के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने के मुद्दे को भी हवा देने की कोशिश की है। पर, उनकी इस बात के चुनावी मुद्दा बनने के आसार बहुत ज्यादा दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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एक तो पूर्वांचल में लंबे वक्त से इस मामले पर कोई हलचल नहीं है, तो यह सवाल भी उठ रहे हैं कि खुद मायावती को बुंदेलखंड या पूर्वांचल जैसे इलाकों को अलग राज्य बनाने की याद उस समय क्यों आई जब यहां चुनाव हो रहे हैं। 
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मायावती ने बतौर मुख्यमंत्री 2011 में प्रदेश को चार हिस्सों पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड में बांटकर इन्हें राज्य बनाने का प्रस्ताव पारित कराया था। यह प्रस्ताव उन्होंने केंद्र को भी भेजा, पर केंद्र ने कई सवाल उठाते हुए उसे वापस कर दिया था।
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प्रस्ताव के अनुसार पूर्वांचल में 32, पश्चिमांचल में 22, अवध में 14 और बुंदेलखंड में सूबे के सात जिलों को शामिल करके नए राज्यों के गठन की बात कही गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह सिर्फ चुनावी राग है।

दरअसल, मायावती ने इस मुद्दे को उठाकर गैर यादव पिछड़ों की लामबंदी की कोशिश की है।  विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अलग राज्य बनाने की नेताओं की बात के पीछे जनता की नहीं, अपनी चिंता ज्यादा है। अगर प्रदेश चार हिस्सों में बंट जाए तो चार नेताओं को सीएम बनने का मौका हासिल हो जाएगा।

मुश्किल है असर पड़ना

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मायावती - फोटो : amar ujala

गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व वरिष्ठ पत्रकार हर्ष सिन्हा कहते हैं कि मायावती के पूर्वांचल के मुद्दे को हवा देने के पीछे उनकी अपनी सियासी गणित भी है। बड़ा प्रदेश होने के नाते उनके वोटों की जातीय गणित सपा के मुकाबले कुछ कमजोर पड़ जाता है, क्योंकि पूरे प्रदेश में यादवों की आबादी काफी अच्छी है।

जो उत्तर प्रदेश के स्तर पर उनकी बड़ी ताकत बनने में प्रमुख बाधा बन जाती है। रही बात इस मुद्दे में दम की तो लोगों को अलग राज्य की बात अपील तो करती है, पर अब जब इस इलाके में मतदान बेहद करीब है तो इसके बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की संभावना नहीं दिखाई देती। 

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. आरपी पाठक भी मायावती की बात का कोई चुनावी असर पड़ने से इन्कार करते हैं। वे कहते हैं कि 2011 के बाद अगर 2017 में वह भी चुनाव के मौके पर मायावती को पूर्वांचल राज्य की याद आ रही है तो इसकी वजह विशुद्ध राजनीतिक है। पर, अब लोगों की समझ में यह बात अच्छी तरह आ गई है कि छोटे राज्य विकास की गारंटी नहीं हैं। इसका उदाहरण झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्य हैं।

पीएम ने भी की पूर्वांचल को साधने की कोश‌िश

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नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही पूर्वांचल के नाम पर अलग राज्य का मुद्दा नहीं उठाया हो लेकिन इस इलाके की दुश्वारियों के बहाने उन्होंने पूर्वांचल को साधने की कोशिशें जरूर कीं।

मोदी सोमवार को पूर्वांचल के मऊ में चुनावी सभा के लिए पहुंचे तो उन्होंने इस इलाके की दुश्वारियों व लोगों की गरीबी की नब्ज पर हाथ रखने के लिए गाजीपुर से सांसद रहे विश्वनाथ प्रसाद गहमरी का सहारा लिया।

उन्होंने कहा, पूर्वांचल के मेहनतकश नौजवानों को पूरा अवसर दिया जाए तो वे इस इलाके को भी हिंदुस्तान की आन-बान और शान बना सकते हैं। यह इलाका भी गुजरात व मुंबई की तरह चमक सकता है। 

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पूर्वांचल की दुश्वारियों और गरीबी की अब तक देश में सरकार चलानेे वालों को जानकारी नहीं थी। पूरी जानकारी थी...पर काम करने की इच्छा शायद नहीं थी।

गाजीपुर से सांसद विश्वनाथ प्रसाद गहमरी ने तो पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे तभी उन्होंने कहा था, ‘पंडितजी आप यूपी से प्रधानमंत्री बने हो, उसी यूपी में एक पूर्वांचल है, वहां गरीबी इतनी ज्यादा है कि लोग गोबर में से गेहूं के दाने निकालकर उसे धोकर अपना पेट भरने को मजबूर हैं।’ गहमरी की बात सुनकर पूरी संसद की आंखों में आंसू आ गए थे।

कई पीएम आए...किसी ने कुछ नहीं किया

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नरेंद्र मोदी

मोदी ने पूर्वांचल के विकास की चिंता को गुजरात कनेक्शन से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, गहमरी की बातें सुनकर पंडित नेहरू ने एक पटेल कमेटी बनाई थी। जिसके अध्यक्ष एचएन पटेल थे। वे भी गुजरात के थे।

कमेटी ने रिपोर्ट में सिफारिश की कि पूर्वांचल को दुश्वारियों व गरीबी से मुक्त कराने के लिए क्या-क्या होना चाहिए। पंडितजी चले गए। उनके बाद भी कई पीएम आए और चले गए। किसी ने कुछ नहीं किया। 

मोदी ने कहा, जब मैं प्रधानमंत्री बना तो पटेल कमेटी की रिपोर्ट निकलवाई। रिपोर्ट के आधार पर पूर्वांचल के विकास के लिए काम शुरू कराए हैं। गंगा नदी पर रेल कम रोड पुल और मऊ से गाजीपुर वाया ताड़ी घाट रेल लाइन का निर्माण शुरू कराना उसी रिपोर्ट का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, सपा, कांग्रेस और बसपा सभी ने पूर्वांचल को छला है। प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है। पूर्वांचल के लोग भी इसमें मदद करें जिससे केंद्र सरकार की तरफ से पूर्वांचल के विकास के लिए शुरू कराए काम में बाधाएं न आएं और प्रदेश सरकार के साथ मिलकर इस इलाके को संपन्न व सुविकसित किया जा सके।

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