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शरीयत में सरकारी दखल के खिलाफ बनेगी रणनीति

Sat, 15 Apr 2017 12:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Updated Sat, 15 Apr 2017 12:01 PM IST
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Policy will be formed against government interference in Shariyat
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

 ट्रिपल तलाक और गोहत्या के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के मौजूदा रुख को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड खासा गंभीर है।

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बोर्ड कार्यकारिणी की शनिवार को नदवा कॉलेज में शुरू हो रही दो दिवसीय बैठक में शरीयत व पर्सनल लॉ में सरकारी दखल, बाबरी मस्जिद मामले में आपसी बातचीत की पहल और गोहत्या के बहाने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने पर बोर्ड अपनी रणनीति तय करेगा।
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अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में बोर्ड के महासचिव मौलना वली रहमानी, उपाध्यक्ष मौलाना फखरुद्दीन अशरफ, मौलाना डॉ. कल्बे सादिक, मौलाना जलालुद्दीन उमरी व मौलाना काका सई सहित सभी 61 सदस्य शामिल होंगे।
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मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक मामलों के सर्वोच्च संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक साथ तीन तलाक मामले में केंद्र और राज्य सरकार के रुख को शरई कानून में हस्तक्षेप माना है। बोर्ड का मानना है कि तीन तलाक के मामले को इस तरह प्रचारित किया जा रहा है, मानो देश की अधिकांश महिलाएं इसके खिलाफ हैं।

बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हमारा संविधान अल्पसंख्यकों को शरीयत कानून के मुताबिक अपने मसले हल करने की इजाजत देता है। देश भर में दारुलकजा व इफ्ता कायम हैं। अगर ये मामले अदालत में जाते हैं तो उन्हें भी मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक ही निर्णय देने चाहिए।

मौलाना ने बताया कि बोर्ड का जोर सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिम समुदाय के साथ ही गैर मुस्लिमों को भी शरीयत की सही जानकारी देने पर है। सोशल मीडिया के जरिये ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाओं को जागरूक करने के साथ ही उनकी मदद भी की जाएगी। बैठक में मोबाइल एप भी लॉन्च किया जा सकता है। पीड़ित महिलाएं इस पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी।


 

सोशल मीडिया पर दूर होंगी निकाह, तलाक की गलतफहमियां

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फेसबुक सुसाइड
बोर्ड का जोर मुस्लिम महिलाओं को शरीयत की सही जानकारी देने पर है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने की तैयारी है। शरीयत में निकाह, तलाक के मायने अब इंस्टाग्राम, वॉट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर भी समझे जा सकेंगे। सोशल मीडिया पर शरई मामलों को लेकर भ्रांतियां फैलाने की साजिश नाकाम करने के लिए बोर्ड का विचार महिला विंग की मदद लेने का है। बोर्ड ने वेबसाइट aimplboard.in के साथ ही सोशल मीडिया डेस्क भी शुरू कर रखी है।

टोल फ्री नंबर पर भी मिल रही सलाह 
पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम वीमेन हेल्पलाइन का टोल फ्री नंबर 18001028426 भी जारी कर चुका है। इस पर मुस्लिम महिलाओं को उर्दू, अंग्रेजी, तमिल, बंगाली, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा में निकाह, तलाक, फस्ख-ए-निकाह, खुला के मामलों में शरीयत की रोशनी में मार्गदर्शन देने की व्यवस्था है। इसके अलावा बोर्ड की ई-मेल आईडी imwhl2016@gmail.com पर भी महिलाओं की शंकाओं के समाधान की व्यवस्था है।
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